सातवें नवरात्र पर माँ कालरात्रि के रूप में संकीर्तन हुआ :आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा
Lokhit express, ( तरुण शर्मा ) Kurukshetra/Yamunanagar ( 26/03/26 ) l श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली के पीठाधीश आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि नवरात्रों के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है I माता के इस सातवें रूप को कालरात्रि कहा जाता है, माँ कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली होती है I इस कारण इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है I यह देवी काल रात्रि ही महामाया है और भगवान विष्णु की योगनिद्रा है I
नवरात्रों का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है I देवी का यह रूप ऋद्धि सिद्धि प्रदान करने वाला है I सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते है तथा इस दिन मां की आंखें खुलती है I
ट्वीटर के माध्यम से समर्थगुरू धारा, मुरथल, हरियाणा के संस्थापक आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने बताया कि आत्मस्मरण या आत्मसुमिरन से साक्षी प्रगाढ़ होता है। साक्षी है तो शांति है। साक्षी है तो खुशी है। साक्षी है तो जीवन में आनन्द है, प्रेम है, उत्साह है।
जीवन परमात्मा का अमूल्य उपहार है। इसलिए जीवन को धन्यवाद भाव से जियो। तुम्हारी हर मुस्कुराहट परमात्मा के प्रति अहोभाव है। तुम्हारा हर गम परमात्मा के प्रति शिकायत है। हंसो, खेलो, नाचो, आनंद में रहो, उत्सव में रहो। यही हमारे जीवन की धन्यता है।
श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली के पुजारी पण्डित राहुल मिश्रा ने वैदिक मन्त्रों के साथ माँ दुर्गा का विशेष पूजा और अर्चना मुख्य यजमान आशा कवातरा के परिवार सहित करवाया I
समस्त विश्व कल्याण हेतु माँ दुर्गा का संकीर्तन, श्री दुर्गा चालीसा का पाठ उषा शर्मा ,निर्मला देवी , सरोज शर्मा , ज्योति तलवाड़, राजकली ,सुमित्रा पाहवा, शिमला धीमान , भक्त सुशील तलवाड़ और छोटे बच्चो के साथ सभी भक्तों ने श्रद्धा भक्ति से किया I माँ दुर्गा जी की आरती के पश्चात् सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया I





