हरियाणा

यह बजट नहीं, राज्यों के साथ भेदभाव की तस्वीर है : भूपेंद्र नफे सिंह राठी

बहादुरगढ़ लोकहित एक्सप्रेस ब्यूरो चीफ (गौरव शर्मा)

केंद्रीय बजट में हरियाणा उपेक्षित, जनता के साथ अन्याय : भूपेंद्र नफे सिंह राठी

युवा इनेलो नेता भूपेंद्र नफे सिंह राठी ने केंद्रीय बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बजट ने हरियाणा की जनता को गहरी निराशा दी है। बजट में हरियाणा के लिए कोई ठोस घोषणा न होना इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार प्रदेश के साथ लगातार उपेक्षा और भेदभाव का रवैया अपना रही है।
भूपेंद्र राठी ने कहा कि बजट दस्तावेज़ों में हरियाणा का नाम लगभग नदारद है। न किसानों के लिए कोई प्रभावी राहत पैकेज सामने आया, न युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों की कोई स्पष्ट रूपरेखा दिखाई दी और न ही प्रदेश के लिए किसी बड़े निवेश या विकास परियोजना की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश के विकास में अहम भूमिका निभाता है—कृषि उत्पादन, औद्योगिक योगदान और देश की रक्षा में यहां के जवानों का योगदान किसी से छिपा नहीं है। इसके बावजूद बजट में हरियाणा की अनदेखी यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार की नीतियां राज्यों के साथ समान व्यवहार पर आधारित नहीं हैं। युवा इनेलो नेता ने सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार यह बताए कि इस बजट से हरियाणा को आखिर मिला क्या? किसान महंगाई, खाद-बीज, डीज़ल और बिजली के बढ़ते खर्च से परेशान हैं, लेकिन एमएसपी, कर्ज़ राहत या आय बढ़ाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं प्रदेश का युवा वर्ग बेरोज़गारी से जूझ रहा है, लेकिन नए रोजगार सृजन या लंबित भर्तियों को लेकर बजट पूरी तरह चुप है। भूपेंद्र राठी ने आगे कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हरियाणा को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना बजट में शामिल नहीं की गई। यह बजट विकास की बजाय उपेक्षा का दस्तावेज़ बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और हरियाणा इसका स्पष्ट उदाहरण है। यह बजट आम जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह विफल साबित हुआ है। इनेलो पार्टी इस बजट का कड़ा विरोध करती है और हरियाणा के हक़ व सम्मान की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रखेगी। भूपेंद्र नफे सिंह राठी ने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश की जागरूक जनता इस भेदभावपूर्ण नीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी और हरियाणा के अधिकारों की लड़ाई और अधिक तेज़ होगी।

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