स्वयंसेविकाओं ने परनाला गाँव के वृद्धजनों में अवसाद व साक्षरता पर किया सर्वे : डाॅ. राजवन्ती शर्मा
बहादुरगढ़ लोकहित एक्सप्रेस ब्यूरो चीफ (गौरव शर्मा)
परनाला गाँव में चल रहे वैश्य आर्य कन्या महाविद्यालय के सात दिवसीय विशेष एन0एस0एस0 शिविर के छठे दिन स्वयंसेविकाओं ने गाँव का भ्रमण किया व वृद्वजनों से मुलाकात की। महाविद्यालय की प्राचार्या डाॅ0 राजवन्ती शर्मा ने सर्वे के लिए जाने वाली स्वयंसेविकाओ को सम्बोधित करते हुए कहा है कि आज के आधुनिक दौड़-भाग की जिन्दगी में हमारे बड़े बुजुर्ग बहुत अकेलापन महसूस करते हैं। घर के छोटे बच्चों की देखभाल व जिम्मेदारी उठाते हैं। परन्तु स्वयं अपने आप के भाव किसी के सामने व्यक्त नहीं कर पाते है। ऐसे में हमारी युवा पीढ़ी की जिम्मेवारी बनती है कि पाते हैं। कि हम वृद्धजनों को मन की बात सुने व उनके जीवन के अनुभवों से जीवन मूल्यों को धारण करें ताकि सुसंस्कृत समाज का निर्माण हो सके। आप सभी वृद्धजनों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुने व समाधान भी करें। साथ ही किसी कारणवश यदि कोई बच्चा अपनी पढ़ाई नहीं कर पा रहा है तों उसके पीछे का कारण जानने का प्रयास करें ताकि गांव परनाला में साक्षरता सर्वे के आधार पर ग्रामवासियों में साक्षरता का स्तर बढ़ाया जा सके। सच्चे स्वयंसेविकाओं का समाज के हर पहलू का निरिक्षण करके समाज के उत्थान में अपना सकारात्मक योगदान दें। एन एस एस प्रोग्राम आफिसर डाॅ. नेहा नैन ने बताया कि प्रातःकालीन सत्र में स्वयंसेविकाओं के योग अभ्यास करके कनाड़ से जुगाड़ करके अनेक प्रकार के आर्ट आईटम बनाए। इसके बाद अलग-2 समूहो में जाकर स्वयंसेविकाओ ने परनाला गंाव साक्षरता व वृद्धजनों में अवसाद पर सर्वेक्षण किया। जिनके अन्तर्गत लगभग 60 प्रतिशत वृद्धजन अकेलापन से जूझ रहे है तथा साक्षरता में भी कमजोर आर्थिक वाले घरों के बच्चे पैसे की तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ रहे है जिनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है।
डाॅ0 नैना फोगाट ने बताया कि सायंकाल सत्र में स्वयंसेविकाओं ने फन गेमज में बढ़ चढ़ कर भाग लिया तथा मानसिक व शारीरिक सन्तुलन को बनाना सीखा। छात्राओं ने खेलो में भाग लेकर दल-निष्ठा, टीम भावना व अनुशासन में रहने के गुर सीखें ताकि जीवन में आने वाली चुनैतियोे का सामना दृढ़ता से कर सके। फन गेम के सफल संचालन में बी.ए. तृतीय वर्ष से स्वीटी, सिमरन, चंचल, बी.ए. द्वितीय वर्ष से तानिया, खुशी, ज्योति, मोनिका व बी.सी.ए. प्रथम वर्ष से वर्षा की मुख्य भूमिका रही।





