पशुपालन एंव डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा साहा अनाज मंडी में शिरकत की।
अंबाला:अशोक शर्मा।
कृषि, मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्राकृतिक खेती भारत वर्ष की पुरानी खेती हैं। देसी गाय को अपनाकर हमें प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होना हैं। किसान एक एकड़ से प्राकृतिक खेती शुरू करें। ऐसा करके हम स्वयं स्वस्थ रह सकते है वहीं आने वाली पीढिय़ों को भी स्वस्थ रखने का काम कर सकते हैं। कृषि, मत्स्य, पशुपालन एंव डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा साहा अनाज मंडी में प्राकृतिक खेती के तहत आयोजित राज्य स्तरीय किसान मेले में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे और यह अभिव्यक्ति उन्होंने अपने सम्बोधन में कहीं। इस मौके पर उनके साथ पूर्व विधायक संतोष चौहान सारवान, पूर्व विधायक डॉ पवन सैनी, एसडीएम विनेश कुमार, उप निदेशक कृषि विभाग डॉ जसविन्द्र सिंह सैनी मौजूद रहें।
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने इस मौके पर यहां पर आयोजित किसान मेले की सराहना करते हुए कहा कि यहां पर कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य संबंधित विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर प्राकृतिक खेती के ओर किसान अग्रसर हा इसे बारे उन्हें तकनीकी उन्नत कृषि यंत्रों के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए तथा किसानों के लिए अनेकों जनहित योजनाएं प्रदेश व केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं। प्राकृतिक खेती करके हम अनेक लाभ हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के तहत जो अनाज उत्पन्न हो रहा हैं, उसकी बिक्री के लिए गुरूग्राम व हिसार में मंडी बनाने का काम किया जा रहा हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्राकृतिक खेती भारत वर्ष की पुरानी खेती हैं। उन्होनें इस मौके पर किसानों से अपील की कि वे इस कार्य के तहत एक एकड़ क्षेत्र से प्राकृतिक खेती शुरू करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती के तहत देसी गाय का भी अहम रोल हैं। विभाग द्वारा प्रत्येक देसी गाय की खरीद पर 30 हजार रूपए की सब्सिडी देने का काम भी किया जा रहा हैं। भारत वर्ष गाय की महत्वता को जानता हैं, गाय की हर चीज महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस मौके पर प्रगतिशील किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती के तहत किसानों को जागरूक करने के कार्य के भी सराहना की। कार्यक्रम के दौरान रेवाड़ी से आए प्रगतिशील किसान यशपाल खोला व अम्बाला के प्रगतिशील किसान लालचन्द ने भी प्राकृतिक खेती को अपनाने के तहत अपने अनुभव व सुझाव उपस्थित किसानों व अन्य के साथ सांझा किए। इस दौरान कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती के तहत हमें जोताई कम करनी है तथा जीव अमृत व बीज अमृत के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना है, ऐसा करके हम अपने आपको स्वस्थ रख सकते हैं।
बॉक्स:- कृषि मंत्री ने इस मौके पर प्रगतिशील किसानों, फसल अवशेष प्रबंधन के तहत बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारियों, कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में विजेता किसानों को प्रमाण पत्र देकर उनको प्रोत्साहित भी किया। उन्होनें इस दौरान यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती बारे किसान कृषि विभाग कार्यलाय के साथ-साथ ब्लॉक लेवल पर पंजीकरण करवाएं ताकि कुरूक्षेत्र स्थित गुरुकुल में तीन दिवसीय कार्यशाला में निशुल्क इस प्रशिक्षण को हासिल करके प्राकृतिक खेती की जानकारी हासिल करके आगे बढ़ सकें। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान स्टॉलों पर लगाएं गए उत्पादों के बारे भी जानकारी हासिल की और संबंधित को कहा कि जो भी किसान या अन्य यहां आ रहे है, उसे सम्पूर्ण जानकारी दें। साथ ही विभाग के अधिकारियों को भी कहा कि कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए जो भी योजनाएं चलाई जा रही है उस बारे उन्हें जानकारी दें।
बॉक्स:- कृषि मंत्री ने इस मौके पर यह भी कहा कि आधुनिक खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है और मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रमाय पड़ रहा है। ऐसे में प्राकतिक खेती एक स्थायी विकल्प के रूप में उभरी है। यह पद्धति पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकों का मिश्रण है जो मिट्टी, पौधों और पर्यावरण के बीच सामंजस्य बनाए रखती है। उन्होंने यह भी बताया गया कि हरियाणा सरकार प्राकृतिक खेती को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है, जिसके लिए साल 2025-26 तक एक लाख एकड़ भूमि को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत किसानों को प्रशिक्षण, स्वदेशी गायों और कृषि उपकरणों के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इसके अंतर्गत हरियाणा सरकार किसानों को 10 हजार रूपये (प्रति एकड़ 4 हजार रुपए व कुल 2.5 एकड़ तक) वित्तीय सहायता प्रदान करती है। कुल वार ड्रम पर (200 लीटर प्रत्येक) 3 हजार रूपए तक सब्सिडी और स्वदेशी गाय खरीदने के लिए 30 हजार रूपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। कृषि मंत्री इस मौके पर किसानों व अन्य की समस्याएं भी सुनी और उन्हें कहा कि जो भी समस्याएं उन्हें बताई गई है उन सभी का समाधान किया जाएगा। इस दौरान ग्राम पंचायत पिलखनी से आए लोगों ने पिलखनी से गांव टोबा वाली सडक़ मार्किटिंग बोर्ड से बनवाने बारे तथा अन्य लोगों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखी।
इस मौके पर पूर्व विधायक संतोष चौहान सारवान व पूर्व विधायक डॉ पवन सैनी ने भी मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए उपस्थित किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा
किसानों के हित के लिए अनेकों जन कल्याणकारी योजनाएं क्रियान्वित की हुई हैं। अधिक से अधिक किसान इन योजनाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने यहां पर विभाग द्वारा आयोजित किसान मेले की भी प्रशंसा की और कहा कि इस मेले के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी मिली हैं।
इस मौके पर कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ जसविन्द्र सिंह सैनी ने मुख्य अतिथि के साथ-साथ अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है जहां पर मेरी फसल मेरा ब्यौरा के साथ खाद को जोड़ा गया हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में फसलों को भी इसमें जोड़ने का काम किया जाएगा। उन्होनें यह भी बताया कि जिला अम्बाला में पराली प्रबंधन के तहत बेहतर कार्य हुए है और इस बारे किसान भी जागरूक हुए हैं, जिसका श्रेय किसानों के साथ-साथ पराली प्रबंधन के तहत कार्य करने वाले कर्मचारियों को जाता हैं। उन्होंने उपस्थित किसानों के साथ-साथ अन्य सभी को कहा कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा के पोर्टल पर पंजीकरण अवश्य करवाएं, क्योंकि फसलों की खरीद के साथ-साथ यदि को फसल सम्बधी को मुआवजा है तो उसे सुगमता से मिल सकें।
इस अवसर पर विभाग के विशेषज्ञ डॉ मनीषा, डॉ उपासना के साथ-साथ अन्य ने प्राकृतिक खेती को अपनाने बारे महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होनें इस मौके पर प्राकृतिक खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सांझा की। विभाग से आए अधिकारियों व अन्य ने विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं बारे भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उप निदेशक डॉ जसविन्द्र सिंह सैनी ने मुख्य अतिथि व अन्य अतिथिगणों को स्मृति चिन्ह व शॉल भेंट कर उनका अभिनंदन भी किया।क्कार्यक्रम के उपरान्त कृषि मंत्री पपलोथा गांव स्थित कर्म सिंह बिट्टू के घर पहुंचे। यहां पहुंचने पर कर्म सिंह बिट्टू ने कृषि मंत्री को शॉल भेंट कर उनका स्वागत किया। कर्म सिंह बिट्टू ने इस मौके पर एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से कृषि मंत्री को अवगत करवाया कि यहां से जो बेगना नदी गुजरती है, जो आगे जाकर मारकण्डा नदी में जाकर मिलती है। वर्षा के दिनों में मारकंडा नदी ओवरफ्लो हो जाती है, जिसके चलते पपलोथा के साथ-साथ गोला, गोली, हरड़ा व अन्य गांव में जलभराव के कारण फसल को भारी नुकसान होता हैं। उन्होंने बेगना नदी व मारकंडा नदी की खुदाई के साथ-साथ विभाग द्वारा इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए परियोजना बनाने बारे आग्रह किया। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की सोच है कि जहां पर भी वर्षा के दिनों में जलभराव के चलते फसल खराब होती है, उसके समाधान के लिए कार्य हो, जिसके लिए किसानों व लोगों से बातचीत कर इसका समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बरसाती पानी की निकासी का कार्य बेहद आवश्यक हैं। इसके लिए जो भी कार्य प्राथमिकता के आधार पर हो सकता है उन्हें किया जाए।
इस मौके पर एसडीएम विनेश कुमार, एसडीएम सतिन्द्र सिवाच, उप निदेशक कृषि एवं कल्याण विभाग जसविन्द्र सिंह सैनी, मंडल अध्यक्ष साहा संजीव सैनी, जिला महामंत्री कर्मचन्द गोल्डी, मुलाना मार्किट कमेटी के चेयरमैन जसमैर राणा, डिम्पल राणा, राजेन्द्र गुप्ता, रमेश पाल नोहनी, मोनिका कालड़ा, संजीव मिश्रा, कर्मचन्द बिट्टू, पूर्व सरपंच नरेश चौहान, कुलदीप बडौला, मांगेराम पंजैल, डॉ उपासना, एसडीओ अंजली राणा, दलबीर सिंह, नरेश कुमार के साथ-साथ अन्य पार्टी के अन्य पदाधिकारीगण,क कार्यकर्ता व गणमान्य लोगों के साथ-साथ किसान मौजूद रहें।





