*चिंतपुरनी माता के मंदिर में लगे जयकारे और वैदिक मंत्रों से हुआ हवन*
मनोज शर्मा,चंडीगढ़। डॉ. विनोद कुमार शर्मा द्वारा रचित ‘बोधयन्ती’ और ‘मन के मंदिर से’ पुस्तकों का विमोचन चिंतपुरनी मंदिर में विधिवत रूप से हुआ। कार्यक्रम से पूर्व चिंतपुरनी माता के मंदिर में जयकारे लगे और वैदिक मंत्रों से हवन हुआ। बोधयन्ती का अर्थ जगाना है अर्थात मानव को जागृत करना है। ‘बोधयन्ती’ काव्य संग्रह में मानव जीवन को देवगुणों से सुसज्जित करने की कामना की गई है। मनुष्य को हर पल मुस्कुराते हुए जीवन यापन करने के लिए कहा है। बुरे लोगों से सतर्क रहने के लिए आगाह किया गया है। मन की आंतरिक शांति के लिए अनहद नाद की अनुभूति करने की परिकल्पना की है। जीवन में नियमों का पालन करने से व्यक्ति उत्थान कर सकता है। बिना सोचे समझे कार्य करने से स्वयं और दूसरों को हानि पहुंचती हैं। ऐसे लोग कानून के शिकंजे की गिरफ्त में आ जाते हैं। प्रकृति का भी सुंदर चित्रण हुआ है।





