पर्यावरण के शोषण से भविष्य में पीने के लिए स्वच्छ जल की हो सकती है भारी किल्लत, सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु पर भी पड़ेगा भारी है असर
Lokhit Express Jagadhri। 04/05/2026 : दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत भगवान की दिव्य लीलाओं व उनके भीतर छिपे हुए गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को कथा प्रसंग व सुमधुर भजन संकीर्तन के माध्यम से उजागर किया जा रहा है। कथा का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा ज्योति प्रज्वलित कर किया गया, जिसमें प्रीति जौहर (अध्यक्ष, BJP महिला मोर्चा), कामला राणा (सदस्य, BJP जिला कार्यकारिणी), कल्पना चौहान (उपाध्यक्ष, BJP महिला मोर्चा), डॉ. बिन्दू धीमान (ऑफिसर, ड्रग्स कंट्रोल), अशोक धीमान (रीजनल हेड, ICICI बैंक), दीपक वर्मा जी (सीनियर S.O., उत्तर रेलवे), संजीव धीमान (सेक्रेटरी, रेड क्रॉस), राज कुमार जी (उत्तर रेलवे), भरत भूषण एवं नीलम जी, एडवोकेट विक्रांत जी सपरिवार, हरदीप सिंह, गुरविन्द्र कौर, मानवेन्द्र जी (ASI, RPF), ललित शर्मा जी, सरपंच सरजंत सिंह (भाम्भोल) और शशि भूषण (डिस्ट्रिक्ट ट्रेनिंग ऑफिसर, रेड क्रॉस सोसाइटी) ,रीना रस्तोगी (पार्षद वार्ड 1),वरिंदर मेहंदीरत्ता सपरिवार विशेष रूप से उपस्थित रहे। कथा के मुख्य यजमान के रूप में सुरेश गुप्ता सपरिवार, अक्षय त्यागी और सुषमा त्यागी , नंदलाल जी और सीमा जी , शिल्पी और विकास जी , शुभम अग्रवाल और चारू अग्रवाल,श्री सुरिन्द्र सिंगला एवं श्री ब्रिजभूषण सिंगला (सिंगला इंडस्ट्रीज), श्री आकाश बांसल जी एवं परिवार तथा श्री ओमपाल जी (सदस्य DNT/विकास बोर्ड, हरियाणा सरकार) ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया।
पर्यावरण असंतुलन की समस्या को उठाते हुए साध्वी सुश्री कालिंदी भारती जी ने कहा कि समाज मानव मन की अभिव्यक्ति है। जब-जब संतों के आदर्शों का परित्याग करते हुए मानव भोग वासना की ओर प्रवृत्त हुआ तब-तब समाज विषाक्त होता है। ज़रूरत मन को प्रदूषण से मुक्त करने की है। जब मन का प्रदूषण समाप्त होगा तब बाहरी पर्यावरण स्वतः ही स्वच्छ हो जाएगा। इसके लिए ज़रूरत है ब्रह्मज्ञान की जो मानसिक शुद्धता का सशक्त साधन है। हमें आवश्यकताओं और लालसाओं में भेद करना होगा। जितनी लालसाएं बढ़ेंगी उतना ही प्रकृति का दोहन होगा। क्या हम आने वाली पीढ़ियों को ऐसी दुनिया देना चाहेंगे? जिसकी हवाओं में ज़हर घुला हो, जहाँ धूल, धुएं और बीमारियां आम बात हों। जहाँ सूख और बाढ़ विनाश की सृष्टि करते हों। संभवतः कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को ऐसी विभीषक दुनिया नहीं देना चाहेगा। यदि हमें एक स्वच्छ व सुंदर समाज का निर्माण करना है तो भारतीय सांस्कृतिक जीवन दृष्टि को पुनर्जीवित करना होगा और उसे सक्रिय रूप से लागू करना होगा। इसी भारत भूमि के संतों ने हमें चेताया कि भूमि के सुखों को भोगो तो सही परन्तु त्यागपूर्वक, यदि त्यागपूर्वक नहीं भोगेंगे तो भोगने की क्षमता और सामर्थ्य नहीं रहेगा। संतों के बताए मार्ग पर चलकर हम पृथ्वी को रसातल के मार्ग पर भेजने से बचा सकते हैं।
साध्वी जी ने इस गंभीर मुद्दे पर विचार देते हुए कहा कि आज का आधुनिक मानव जिस गति से पर्यावरण का शोषण कर रहा है उसके परिणामस्वरूप आने वाले कुछ समय में पृथ्वी पर न तो पीने के लिए स्वच्छ जल बचेगा और न ही सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु। पृथ्वी के हाहाकार से, प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति का स्तर भी बढ़ जाएगा। इसलिए यदि समय रहते इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए तो मानव अपने भविष्य के लिए स्वयं ज़िम्मेदार होगा। वर्तमान समय में यदि कोई आपदा मानव जीवन को खत्म करने का प्रयत्न कर रही है तो वह है पर्यावरण में बढ़ रहा प्रदूषण। इसमें तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है व समुद्र के पानी का स्तर ऊपर उठता जा रहा है। यदि यह ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन पृथ्वी के अस्तित्व को खतरा हो जाएगा। हमारे पर्यावरण में पूरी तरह से ज़हर घुल चुका है। इसका ज़िम्मेदार स्वयं मानव ही है। जिसकी विकासवादी सोच आज मानव जाति के लिए घातक सिद्ध हो रही है। इसी सोच के कारण ही मानव प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को भूलता जा रहा है। वह संवैधानिक व सामाजिक नियमों की धज्जियाँ उड़ा कर वातावरण में ज़हर घोलता जा रहा है। 19वीं सदी तक प्रदूषण नाम की समस्या से लोग अनभिज्ञ थे परन्तु जैसे ही औद्योगिक क्रांति आई संसार में प्रतिदिन नए-नए कारखाने खुलने लगे। इनके द्वारा पैदा किए गए ज़हरीले धुएं व कच्चे माल की पूर्ति के लिए प्राकृतिक साधनों के शोषण ने इस समस्या को जन्म दे दिया है। इस क्रांति के साथ ही मानव की ज़िंदगी का पूरी तरह से मशीनीकरण हो चुका है। मानव की ज़रूरतों में हुई बढ़ोतरी के कारण वह प्राकृतिक साधनों का दुरुपयोग करने लग गया है। इसकी पूर्ति के लिए मनुष्य ने पौधों की कटाई कर कंक्रीट के जंगलों का निर्माण करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा नदियों को कारखानों की गंदगी फेंकने के लिए कूड़ादान बना लिया है। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने के कारण सूर्य की भयानक किरणों से हमारा बचाव करने वाली ओज़ोन परत में भी छिद्र हो चुका है। जिस कारण आज मानव भयानक व नामुराद बीमारियों से ग्रसित है। यदि इस प्रदूषण को न रोका गया तो वर्ष 2054 तक हमारी सुरक्षा कवच ओज़ोन परत पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी। आज की कथा में पर्यावरण जागरूकता संबंधी एक विशेष स्टाल लगाया गया व आए हुए भक्त श्रद्धालुगणों को पौधे वितरित किए गए। उल्लेखनीय है कि दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा प्रस्तुत इस कथा में प्रतिदिन सामाजिक बुराइयों व समस्याओं के प्रति विश्लेषणात्मक विचार प्रस्तुत किए जा रहे हैं। उपस्थित प्रभु भक्त इसी रोचकता के चलते बड़ी संख्या में कथा श्रवण हेतु पधार रहे हैं।
श्री मद्भागवत की कथा में भगवान श्री कृष्ण की नटखट व भाव विभोर करने वाली लीलाओं को कथा प्रसंग व मधुर संकीर्तन के माध्यम से श्रवण कर भक्त श्रद्धालुगण मंत्र मुग्ध हो झूमने को मजबूर हो उठे। कथा के उचित प्रबंध व सुव्यवस्था के कारण पूरा पंडाल मानो वृंदावन की छटा बिखेर रहा था।





