जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ द्वारा 12 दिसंबर 2025 को शून्यकाल के दौरान उठाए गए महत्वपूर्ण विषय “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील और हानिकारक रील्स के प्रसार को रोकने हेतु नियामक प्रावधानों की आवश्यकता” पर केंद्र सरकार ने विस्तृत और तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत किया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि भारत का मौजूदा कानूनी ढांचा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोकने में पूर्णतः सक्षम और प्रभावी है। उन्होंने कहा कि सरकार इंटरनेट को सुरक्षित, जिम्मेदार और कानूनसम्मत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा साइबर स्पेस में उत्पन्न चुनौतियों से निपटने हेतु निरंतर ठोस कदम उठा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत विभिन्न साइबर अपराधों के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं, जिनमें धारा 66C (पहचान की चोरी), धारा 66D (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), धारा 66E (निजता का उल्लंघन), धारा 67 एवं 67A (अश्लील एवं यौन स्पष्ट सामग्री का प्रकाशन/प्रसारण), धारा 67B (बाल यौन शोषण सामग्री), धारा 69A (सरकारी निर्देशों के तहत जानकारी को ब्लॉक करना) तथा धारा 66F (साइबर आतंकवाद) जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इसके साथ ही, आईटी नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज़ पर यह दायित्व तय किया गया है कि वे उचित सावधानी का पालन करते हुए अपने प्लेटफॉर्म पर अश्लील, पोर्नोग्राफिक, पैडोफिलिक, निजता का उल्लंघन करने वाली, लैंगिक या नस्लीय रूप से आपत्तिजनक, बच्चों के लिए हानिकारक, भ्रामक अथवा कानून-विरुद्ध सामग्री के प्रसार को रोकें, अन्यथा उन्हें कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं होगा और वे विधि के अनुसार उत्तरदायी होंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश या सरकार/अधिकृत एजेंसी द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर किसी भी अवैध सामग्री को निर्धारित समयसीमा के भीतर हटाना इंटरमीडियरी के लिए अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले महत्वपूर्ण सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को भारत में ग्रिवेंस ऑफिसर, चीफ कंप्लायंस ऑफिसर तथा नोडल संपर्क अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ 24×7 समन्वय सुनिश्चित हो सके। उपयोगकर्ताओं की शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए सरकार द्वारा ग्रिवेंस अपीलेट कमेटियों का गठन भी किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही, 20 फरवरी 2026 से लागू संशोधित आईटी नियमों के माध्यम से सिंथेटिक जनरेटेड सूचना तथा डीपफेक जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए सशक्त प्रावधान किए गए हैं। इन संशोधनों में ऑडियो, विजुअल एवं ऑडियो-विजुअल सूचना की परिभाष, एसजी आई को कानूनी दायरे में शामिल करना, उपयोगकर्ताओं को प्रत्येक तीन माह में जागरूक करना, अवैध सामग्री हटाने की समयसीमा को और सख्त करना, एसजीआई के लिए विशेष उचित सावधानी ढांचा लागू करना तथा ऐसे कंटेंट के लिए लेबलिंग, मेटाडेटा और तकनीकी सत्यापन को अनिवार्य करना शामिल है, जिससे भ्रामक, हानिकारक एवं राष्ट्रहित के विरुद्ध सामग्री के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। सांसद मदन राठौड़ ने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए इस विस्तृत, स्पष्ट और दूरदर्शी उत्तर की सराहना करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर अश्लील एवं हानिकारक सामग्री के विरुद्ध यह पहल समय की आवश्यकता थी और सरकार ने इस दिशा में निर्णायक कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के सख्त प्रावधानों तथा हालिया संशोधनों से न केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही सुनिश्चित होगी, बल्कि देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को डिजिटल खतरों से सुरक्षा भी मिलेगी। राठौड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की डिजिटल नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज भारत एक सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम की ओर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि इंटरनेट का उपयोग कानूनसम्मत, नैतिक और समाजहित में हो, जो देश के डिजिटल भविष्य को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार इसी प्रकार सख्त, प्रभावी और दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से भारत को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त बनाएगी।




