जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । 18वीं सदी में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा निर्मित विश्व प्रसिद्ध जल महल आज गंदगी, कचरे और प्रदूषण से जूझ रहा है। देश-विदेश से लाखों पर्यटक इस राजपूत-मुगल वास्तुकला देखने आते हैं,लेकिन पीछे का हिस्सा कचरे का अंबार बना रहता है। 20 फरवरी को भारतीय वायुसेना के सूर्यकिरण एयरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने मानसागर झील के ऊपर भव्य एयर शो किया। बड़ी भीड़,उच्च अधिकारी और पर्यटक जुटे, लेकिन मुख्य द्वार की सतही सफाई के अलावा पीछे कोई ध्यान नहीं। एयर शो 22 फरवरी तक चलेगा। हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने डबल इंजन सरकार के आने पर 2 साल पहले सफाई का वादा किया था,पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं। शाम होते ही पीछे शराब-नशे की भीड़ जमा हो जाती है,पुलिस वर्षों से राउंड नहीं मारती। नगर निगम ने दिसंबर 2025 में बड़े सफाई अभियान चलाए,नावों से कचरा निकाला,लेकिन समस्या जस की तस। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण पर NEERI से रिपोर्ट मंगाई,नालियों का गंदा पानी झील में गिर रहा है,मछलियाँ मर रही हैं। केंद्र ने नवंबर 2024 में जल महल के लिए 96.61 करोड़ रुपये मंजूर किए,झील पुनरुद्धार और प्रोमेनेड विकास के लिए। यदि झील पूरी तरह साफ हो जाए और नौका विहार शुरू हो जाए,तो यह पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थल बन सकता है। भीड़ बढ़ेगी,सरकार को टिकट,बोट राइड और अन्य सुविधाओं से अच्छी कमाई होगी। दूसरा विकल्प,PPP मॉडल में किसी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपना—वह प्रचार करेगी,रखरखाव पर खर्च करेगी और पुरानी रौनक लौटाएगी। पहले भी 2004 में PPP से झील सफाई और पुनरुद्धार हुआ था,लेकिन अब स्थायी समाधान जरूरी। प्रशासन को तत्काल कदम उठाकर इस धरोहर को बचाना चाहिए,वरना पर्यटन और विरासत दोनों खतरे में हैं।
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।


