उप कृषि निदेशक जसविन्द्र सैनी ने कहा विभाग द्वारा किसानों में जागरूकता बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं
अक्तूबर:अशोक शर्मा
उप कृषि निदेशक जसविन्द्र सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि पराली प्रबंधन को प्रभावी रूप से बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष किसानों को 1200 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस राशि का उद्देश्य किसानों को पराली में आग लगाने के स्थान पर सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल पराली प्रबंधन विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा किसानों में जागरूकता बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम स्तर पर बार-बार मुनादी करवाई जा रही है तथा ग्राम सभाओं के माध्यम से किसानों को पराली प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं एवं तकनीकी उपायों की जानकारी दी जा रही है। अंबाला जिले में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। प्रत्येक 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिनकी जिम्मेदारी अपने क्षेत्र के किसानों से संपर्क स्थापित कर उन्हें पराली प्रबंधन के महत्व से अवगत कराना, वैकल्पिक उपायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा किसानों द्वारा किए गए कार्यों का सत्यापन करना है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रोत्साहन राशि का वितरण केवल तभी किया जाएगा, जब संबंधित नोडल अधिकारी द्वारा किसान के खेत में किए गए पराली प्रबंधन कार्य की सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी। राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। वहीं, यदि कोई किसान अपने खेत में पराली को जलाते हुए पाया जाता है, तो नोडल अधिकारी को ऐसे किसानों पर 30,000 तक का जुर्माना लगाने का अधिकार होगा। साथ ही ऐसे किसानों के नाम पर मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री दर्ज की जाएगी, जिससे वे अपनी फसल को एमएसपी, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच नहीं पाएंगे और उन्हें विभाग की किसी भी अन्य योजना का लाभ प्राप्त नहीं होगा। गंभीर मामलों में संबंधित किसान के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस बार पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए सेटेलाइट निगरानी प्रणाली को और सशक्त किया गया है। अब खेतों की निगरानी 24 घंटे निरंतर की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार की आगजनी की घटना पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। कृषि विभाग ने इस अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने का संकल्प लिया है।
अंबाला जिले के सहायक कृषि अभियंता एवं मुख्य नोडल अधिकारी श्री सुभाष चंद्र ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेषों में आग न लगाकर पर्यावरण की रक्षा करना तभी संभव है, जब किसान स्वयं आगे आकर इसमें सहयोग करें। केवल कृषि विभाग की सजगता पर्याप्त नहीं है; किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही हम इस दिशा में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं। मृदा हमारी जीवनरेखा है — यह हमारे भोजन की जननी और वायु की शुद्धि का माध्यम है। यदि आज हमने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो आने वाली पीढिय़ों के लिए यह धरती रहने योग्य नहीं रह जाएगी। अत: आइए, हम सब मिलकर स्वच्छ पर्यावरण, उपजाऊ मृदा और स्वस्थ भविष्य के निर्माण में योगदान दें।





