चंडीगढ

*डॉ. विनोद शर्मा की दो पुस्तकों बोधयन्ती’ और ‘मन के मंदिर से’ का हुआ विमोचन*

*चिंतपुरनी माता के मंदिर में लगे जयकारे और वैदिक मंत्रों से हुआ हवन*

मनोज शर्मा,चंडीगढ़। डॉ. विनोद कुमार शर्मा द्वारा रचित ‘बोधयन्ती’ और ‘मन के मंदिर से’ पुस्तकों का विमोचन चिंतपुरनी मंदिर में विधिवत रूप से हुआ। कार्यक्रम से पूर्व चिंतपुरनी माता के मंदिर में जयकारे लगे और वैदिक मंत्रों से हवन हुआ। बोधयन्ती का अर्थ जगाना है अर्थात मानव को जागृत करना है। ‘बोधयन्ती’ काव्य संग्रह में मानव जीवन को देवगुणों से सुसज्जित करने की कामना की गई है। मनुष्य को हर पल मुस्कुराते हुए जीवन यापन करने के लिए कहा है। बुरे लोगों से सतर्क रहने के लिए आगाह किया गया है। मन की आंतरिक शांति के लिए अनहद नाद की अनुभूति करने की परिकल्पना की है। जीवन में नियमों का पालन करने से व्यक्ति उत्थान कर सकता है। बिना सोचे समझे कार्य करने से स्वयं और दूसरों को हानि पहुंचती हैं। ऐसे लोग कानून के शिकंजे की गिरफ्त में आ जाते हैं। प्रकृति का भी सुंदर चित्रण हुआ है।

दिव्यता के लिए श्रेष्ठ गुण धारण करने होंगे। प्रत्येक व्यक्ति को मानव भलाई के लिए कार्य करने चाहिए। मित्र का चयन बड़ी सावधानी से करना चाहिए। इस काव्य-संग्रह में कई पक्षों पर प्रकाश डाला है। वहीं दूसरे काव्य संग्रह’मन के मंदिर से’ईश्वर स्तुति, प्रार्थना उपासना का भजन संग्रह है। डॉ विनोद शर्मा ने बताया कि जीवन के सफ़र में अच्छे लोगों का साथ मिला। ‘मन के मंदिर से’ भजन-संग्रह को ईश्वर की कृपा समझता हूं। वही कवियों की क़लम को सही गति देता है।

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