चंडीगढ

*डॉ. प्रज्ञा शारदा के काव्य संग्रह ‘खामोशियांँ” का विमोचन और चर्चा गोष्टी का हुआ विमोचन*

मनोज शर्मा,चंडीगढ़ । संवाद साहित्य मंच और आचार्य कुल संस्था की ओर से आज कम्युनिटी सेंटर सेक्टर 43 के सभागार में प्रसिद्ध लेखिका डॉ. प्रज्ञा शारदा के काव्य संग्रह ‘खामोशियांँ ‘ का विमोचन,चर्चा और काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार और प्रोग्राम एगजेक्टिव,आकाशवाणी जालंधर के श्री सोहन कुमार,विशिष्ठ अतिथि प्रेमलता ,पार्षद और प्रसिद्ध कवि दीपक चनारथल रहे ।पुस्तक पर प्रपत्र वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज, अशोक नादिर,डॉ. विनोद शर्मा,डॉ अनीश गर्ग और अन्नु रानी शर्मा ने प्रस्तुत किया ।कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ‘गीत’ द्वारा और सरस्वती वंदना पल्लवी रामपाल ने की। कार्यक्रम के आरंभ में के. के. शारदा ने सबका स्वागत किया और धन्यवाद पार्षद प्रेमलता ने किया।

तत्पश्चात काव्य संग्रह की लेखिका डॉक्टर प्रज्ञा शारदा ने अपनी रचना प्रक्रिया की जानकारी देते हुए अपनी कुछ रचनाओं की प्रस्तुति दी।
पुस्तक पर प्रपत्र पढ़ते हुए वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज ने कहा कि ‘खामोशियांँ’ काव्य संग्रह में खामोशियांँ बहुत कुछ कह जाती हैं, उसे समझने वाला चाहिए । कवियत्री ने कविताओं में आम आदमी की वेदना, संघर्ष और द्वंद्व को कविताओं में पेश किया है। कविवर डॉ. विनोद शर्मा ने काव्य संग्रह पर बोलते हुए कहा कि इस काव्य संग्रह में आपको समाज और परिवार के सभी पक्ष मिल जाएंगे। कवित्री ने खुली आंँख से रिश्ते, संबंधों को देखा और उन्हें कविताओं में प्रस्तुत किया। शायर अशोक नादिर ने पुस्तक पर बोलते हुए कहा कि उनकी कविताएं हमारे समाज और परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। कवित्री ने इन सभी को खुली आँख से देखा और इन्हें कविताओं में प्रस्तुत किया। कविवर डॉ.अनीश गर्ग ने पुस्तक पर बोलते हुए कहा की कविताओं में दैनिक जीवन से प्रसंग लिए गए हैं,जो की बहुत प्रभावशाली है। अन्नु रानी शर्मा ने काव्य संग्रह पर बोलते हुए कहा कि कवित्री का एक लंबा अनुभव इन कविताओं में हमें देखने को मिलता है। उन्होंने जीवन में और अपने परिवार में जो कुछ भी देखा उसे कविताओं में प्रस्तुत किया है। ऑल इंडिया रेडियो की उद्घोषक मोनिका मेहता ने काव्य संग्रह पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर ट्राई सिटी के हिंदी ,पंजाबी और उर्दू के लगभग 55 कवि उपस्थित रहे। इस अवसर पर सुरजीत सिंह धीर ने प्रज्ञा शारदा जी की कविता ‘खामोशी’ तरन्नुम में प्रस्तुत की। इनके अलावा किशोर कुमार,वीणा ढींगरा,राज विज, पल्लवी रामपाल,एम.एल.अरोड़ा,गुरदर्शन सिंह मावी,कृष्णा गोयल,आर.के.भगत,मंजू चौहान, लाजपत राय गर्ग,संतोष गर्ग,नीरू मित्तल,डेज़ी बेदी,ब्रिज भूषण शर्मा,अनिल चिंतक,विंदर माझी,अनीता गगरेजा,सतवंत कौर गिल,पाल अजनबी,एम.एल.अरोड़ा,तजेंद्र ठाकुर,एम. एम जुनेजा,राजेंद्र सिंह, नितिन रामपाल,अन्नु शर्मा, करिश्मा वर्मा,पूनम,शिक्षित, गुरमीत कौर, मनजीत कौर उपस्थित रहे।

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