दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा श्री राम कथा अमृत का भव्य आयोजन किया
October 18th, 2026 | Post by :- | 20 Views

 

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा श्री राम कथा अमृत का भव्य आयोजन किया ।

जंडियाला गुरु कुलजीत सिंह

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रघुनाथ डालियाना मंदिर, जंडियाला गुरु में तीन दिवसीय ‘राम सुमिर मे’ कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीराम कथामृत का भव्य आयोजन किया । कार्यक्रम के तीसरे दिन श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी विरेशा भारती जी ने कहा कि जब-जब मानव जीवन में धर्म और सत्य का मार्ग धुंधला पड़ने लगता है, तब प्रभु अपनी दिव्य लीलाओं के माध्यम से मानवता का मार्गदर्शन करते हैं। किंतु प्रभु की लीलाएँ केवल बुद्धि और तर्क के आधार पर समझने का विषय नहीं हैं। जिस प्रकार पर्वत की तलहटी में खड़ा व्यक्ति उसकी वास्तविक ऊँचाई का पूर्ण आकलन नहीं कर सकता, उसी प्रकार आध्यात्मिक दृष्टि के अभाव में मनुष्य प्रभु के दिव्य स्वरूप और उनकी लीलाओं के गूढ़ रहस्यों को नहीं समझ पाता। लंका कांड में रावण का प्रसंग इसका सशक्त उदाहरण है। अपनी विद्वत्ता, शक्ति और अहंकार के मद में चूर रावण प्रभु श्रीराम के वास्तविक स्वरूप को पहचान नहीं सका। अंततः उसका अहंकार और अधर्म उसके पतन का कारण बने। यह प्रसंग मानव को संदेश देता है कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य अहंकार की वृद्धि नहीं, बल्कि विनम्रता, विवेक और सत्य के प्रति समर्पण का विकास करना है।साध्वी जी ने आगे प्रभु श्रीराम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने और माता सीता को मुक्त कराने के पश्चात अयोध्या लौटने के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी केवल एक राजकुमार के अपने राज्य में लौटने की घटना नहीं, बल्कि धर्म की अधर्म पर, सत्य की असत्य पर और प्रकाश की अंधकार पर विजय का प्रतीक है। प्रभु के अयोध्या आगमन पर संपूर्ण नगरी में हर्षोल्लास छा गया और उनके राज्याभिषेक के साथ रामराज्य की स्थापना का आदर्श सामने आया। रामराज्य का भाव केवल सुशासन तक सीमित नहीं, बल्कि न्याय, करुणा, मर्यादा, समानता और लोककल्याण पर आधारित जीवन-व्यवस्था का प्रतीक है। आज भी यदि मानव प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर ले, तो परिवार, समाज और राष्ट्र में सद्भाव, प्रेम तथा नैतिक मूल्यों की स्थापना संभव है। साध्वी जी ने स्पष्ट किया कि प्रभु की दिव्य लीलाओं का वास्तविक मर्म तभी प्रकट होता है, जब मानव के अंतर्घट में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश उदित होता है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से जागृत हुई आध्यात्मिक दृष्टि ही मनुष्य को बाहरी घटनाओं के पीछे छिपे गूढ़ संदेशों को समझने और उन्हें अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देती है। पूर्ण सतगुरु की शरण में प्राप्त ब्रह्मज्ञान मानव को आत्मबोध की दिशा में अग्रसर कर उसके विचारों, व्यवहार और दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। इसी आंतरिक परिवर्तन से धर्मनिष्ठा, राष्ट्रप्रेम, संस्कृति के संरक्षण, परोपकार, क्षमा, प्रेम और निःस्वार्थ सेवा जैसे दिव्य गुणों का विकास होता है।
प्रोग्राम के दौरान स्वामी रंजीतानंद जी, साध्वी कृष्णप्रीता भारती, साध्वी नीरजा भारती, सविंदर सिंह बबला जी, श्री हरभजन सिंह ईटीओ कैबिनेट मंत्री पंजाब, श्रीमती सुनीता रंधावा निर्वाचन क्षेत्र प्रभारी महिला विंग, सतिंदर सिंह अध्यक्ष नगर परिषद जंडियाला गुरु, अवतार सिंह पार्षद, रॉबिन पासाहन पार्षद, मनजिंदर सिंह हैप्पी पार्षद, जयदेव शर्मा अध्यक्ष ब्राह्मण सभा जंडियाला गुरु, प्रत सिंह, रविंदर पाल सिंह पूर्व अध्यक्ष नगर परिषद, साहिल शर्मा जी मंदिर अध्यक्ष, प्रवीण शर्मा सचिव मंदिर

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