**‘राम सुमिर मे’ में केवट प्रसंग ने दिया निष्कपट भक्ति और समर्पण का संदेश।
, जंडियाला गुरु कुलजीत सिंह 
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रघुनाथ डालियाना मंदिर, जंडियाला गुरु में आयोजित ‘राम सुमिर मे’ कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीराम कथामृत में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी विरेशा भारती जी ने केवट प्रसंग के माध्यम से प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम, विश्वास और निःस्वार्थ भक्ति की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीराम कथा केवल भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का वर्णन नहीं, बल्कि मानव जीवन को आदर्शों, मर्यादा, प्रेम और आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। कथा के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन में भक्ति, विनम्रता, सेवा और समर्पण जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा प्राप्त करता है। केवट प्रसंग का उल्लेख करते हुए साध्वी जी ने कहा कि केवट के लिए प्रभु श्रीराम के चरणों की सेवा करना ही परम सौभाग्य था। उसका प्रेम किसी सांसारिक स्वार्थ पर आधारित नहीं था, बल्कि पूर्ण श्रद्धा और निष्कपट समर्पण से परिपूर्ण था। यह प्रसंग संदेश देता है कि प्रभु के प्रति सच्ची भक्ति धन, पद अथवा बाहरी आडंबरों से नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता से प्रकट होती है। साध्वी जी ने समझाया कि ईश्वर के प्रति प्रेम और विश्वास तभी दृढ़ होते हैं, जब मनुष्य उनके वास्तविक स्वरूप को जानता है। गोस्वामी तुलसीदास जी के शब्दों में, “जाने बिना न होइ परतीती, बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती।” इसलिए जीवन में पूर्ण सतगुरु का सान्निध्य और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति अत्यंत आवश्यक है, जो मनुष्य को ईश्वर का प्रत्यक्ष अनुभव कराकर उसकी भक्ति को स्थायी आधार प्रदान करते हैं। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी इसी सनातन आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मानवता को ईश्वर-साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित कर रहे हैं। श्रीराम कथा का वास्तविक उद्देश्य भी तभी सार्थक होता है, जब इसके दिव्य संदेशों को सुनने के साथ-साथ उन्हें जीवन में धारण किया जाए और प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए प्रेम, सेवा, विनम्रता तथा समर्पण से परिपूर्ण जीवन का निर्माण किया जाए।
कथा के दौरान साध्वी नीरजा भारती, साध्वी कृष्णप्रीता भारती, स.सुविंदर बबला, श्री साहिल शर्मा, स.परगट सिंह, प्रवीण शर्मा, सुरेंद्र सोनु (पार्षद), पंडित रघुवीर, पंडित वीर आदि उपस्थित रहे।
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