अयोध्यावासियों की विदाई ने किया भावुक, केवट की भक्ति और समर्पण ने जीता दर्शकों का दिल
October 13th, 2026 | Post by :- | 26 Views

गजसिंहपुर,(यश कुमार)। श्री महावीर ड्रामेटिक क्लब, गजसिंहपुर द्वारा आयोजित रामलीला में मंगलवार को राम वनवास के मार्मिक प्रसंगों का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन गमन, अयोध्यावासियों द्वारा उन्हें रोकने के प्रयास, गुह निषाद से भेंट, केवट-राम के भावपूर्ण संवाद तथा राजा दशरथ के स्वर्गवास के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। लीला में भगवान श्रीराम के पिता के वचन का पालन करते हुए वन जाने के निर्णय का मंचन किया गया। माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए रवाना होते हैं। जब अयोध्यावासियों को श्रीराम के वन गमन का पता चलता है, तो वे उन्हें रोकने का प्रयास करते हैं। प्रभु श्रीराम के प्रति नगरवासियों का प्रेम और उनके वियोग का दुख मंच पर सजीव हो उठा। राम, सीता और लक्ष्मण के अयोध्या से प्रस्थान के दृश्य में कलाकारों ने त्याग, कर्तव्य और मर्यादा की भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वन यात्रा के दौरान भगवान श्रीराम की गुह निषाद से भेंट का मंचन किया गया। इसके बाद केवट और भगवान श्रीराम के बीच हुए भावपूर्ण संवाद ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। केवट द्वारा प्रभु श्रीराम के चरण पखारने की इच्छा, उसकी अनन्य भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण को कलाकारों ने सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। केवट की विनम्रता और प्रभु श्रीराम के प्रति प्रेम से भरे इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इस दृश्य के माध्यम से भक्ति, प्रेम और समानता का संदेश दिया गया। दूसरी ओर, अयोध्या में भगवान श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ की व्याकुलता बढ़ती जाती है। पुत्र वियोग में उनकी पीड़ा और अंततः स्वर्गवास के मार्मिक प्रसंग का मंचन किया गया। राजा दशरथ के दुखद अंत ने रामलीला के वातावरण को शोकाकुल बना दिया। इस प्रसंग ने दर्शकों को माता-पिता और संतान के गहरे भावनात्मक संबंधों की अनुभूति कराई। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया। रामलीला में राजा दशरथ की भूमिका मंगत राम शर्मा, कैकई की शिवचरण, भगवान श्रीराम की बालकिशन गिरधर, गुह निषाद की ललित काठपाल, भरत की दीपांशु काठपाल, शत्रुघ्न की राकेश मेव, केवट की संजय जुनेजा तथा सौमित्र की भूमिका तन्मय वधवा ने निभाई। कलाकारों ने अपने संवादों एवं भावपूर्ण अभिनय से राम वनवास प्रसंग को जीवंत बना दिया। रामलीला देखने पहुंचे धर्मप्रेमी दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।

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