समय पर पहचान एवं आधुनिक उपचार से बढ़ रहा ब्लड कैंसर का क्योर रेट
September 26th, 2026 | Post by :- | 28 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । ब्लड कैंसर कई प्रकार के होते हैं और बीमारी के प्रकार के अनुसार लक्षण भी अलग-अलग होते है। जागरूक होकर अगर समय पर लक्षणों का पता चले और सही उपचार की शुरुआत हो तो रोगी को कैंसर मुक्त करना आसान हो जाता है। ब्लड कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ प्रकाश सिंह शेखावत ने बताया कि सितंबर माह ब्लड कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसे ब्लड कैंसर के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना, शुरुआती संकेतों को पहचानने, समय पर जांच कराने और आधुनिक उपचार को अपनाने के लिए प्रेरित करना है। डॉ शेखावत ने बताया कि ब्लड कैंसर का समय पर पता चलना और सही उपचार शुरू होना मरीज के बेहतर परिणामों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सामान्य रूप से बोन मैरो और रक्त कोशिकाओं में होने वाले जेनेटिक बदलाव इन बीमारियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकांश मामलों में ब्लड कैंसर होने का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता।
*कमजोरी, थकान एवं बुखार है अहम लक्षण*
ब्लड कैंसर के लक्षण बीमारी के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। लगातार थकान, कमजोरी, रक्त की कमी, बिना कारण वजन कम होना, बार-बार बुखार या संक्रमण होना, रात में अत्यधिक पसीना आना, शरीर पर आसानी से नीले निशान या ब्लीडिंग होना, त्वचा का पीला पड़ना, लिम्फ नोड्स में सूजन तथा पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन या दर्द जैसे नहण दिखाई दे सकते हैं। कई बार शुरुआती अवस्था में कोई स्पष्ट लक्षण भी नहीं होते। इसलिए लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सीय सलाह लेना आवश्यक है।
*पेशेंट के खुद की सेल करती है अब कैंसर का उपचार*
ब्लड कैंसर के उपचार में पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। बीमारी के प्रकार और मरीज की स्थिति के आधार पर कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी इम्यूनोथेरेपी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और कार-टी सेल थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार विकल्प उपलब्ध है। टार्गेटेड थेरेपी कैंसर कोशिकाओं में मौजूद विशिष्ट बदलावों को निशाना बनाती है, जबकि कार-टी सेल थेरेपी में मरीज की अपनी इम्यून कोशिकाओं को प्रयोगशाला में इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन पर हमला कर सकें। डॉ शेखावत ने बताया कि राज्य में सर्वप्रथम एवं सर्वाधिक कार-टी सेल थेरेपी करने वाले बीएमसीएच में ब्लड कैंसर के उपचार के लिए अगल विंग मौजूद है जहां अब तक 191 बीएमटी एवं 9 कार-टी सेल थेरेपी की जा चुकी है।
*निःशुल्क उपचार की सुविधा भी उपलब्ध*
बीएमसीएच के ब्लड कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि ब्लड कैंसर का उपचार अन्य कैंसर की. पुल ने ज्यादा महंगा होता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर रोगी भी नियमित रूप से उपचार ले सके इसके लिए बीएमसीएच में दो योजनाएं चल रही है. जिसमें चार तहत के ब्लड कैंसर का सम्पूर्ण उपचार निःशुल्क दिया जा रहा है। बच्चों वो लिए डोनेट ए लाइफ प्रोजेक्ट के तहत एएलएल, एपीएमएल और हॉजकिन्स लिम्फोमा का निशुल्क उपचार किया जा रहा है। वहीं वयस्कों के लिए फ्रीडम फ्रॉम कैंसर प्रोजेक्ट के तहत सीएमएल कैंसर का निःशुल्क उपचार दिया जा रहा है। इन दोनों प्रोजेक्ट में 562 रोगी रजिस्टर्ड है, जिनमें से 389 रोगी वर्तमान में नियमित उपचार की सहायता से कैंसर मुक्त जीवन जी रहे है। इस योजनाओं के तहत 13.87 करोड कुल खर्च के जरिए जांच, दवा सहित सम्पूर्ण उपचार निःशुल्क दिया जा रहा है।
*कैसर मुक्त रहने के लिए नियमित फॉलोअप है जरूरी*
डॉ शेखावत ने बताया कि ब्लड कैंसर के उपचार को बीच में छोड़ना या दवाओं का अनियमित सेवन मरीज के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में जरूरी है कि रोगी कैंसर मुक्त होने के बाद भी नियमित रूप से डॉक्टर को दिखाएं, जांच करवाए और परामर्श के अनुसार दवा का सेवन करता रहे। कई बार रोगी कैंसर मुक्त होने के बाद डॉक्टर के पास फॉलोअप के लिए आना बंद कर देते हैं, जिससे रोगी में दोबारा कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे रोगी को उपचार के बाद एक बाद फिर से कैंसर मुक्त करना चुनौतीपूर्ण होता है।

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