गजसिंहपुर,(यश कुमार)। इस बार का निकाय चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने का अवसर नहीं है। यह तय करने का मौका भी है कि अगले पांच साल गजसिंहपुर शहर की राजनीति किस दिशा में जाएगी। ऐसे में मतदाता के सामने सिर्फ उम्मीदवार का चेहरा, पार्टी, रिश्तेदारी या व्यक्तिगत समीकरण ही कसौटी न हों, बल्कि उसकी नीयत, विचारधारा, पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही भी वोट का आधार बननी चाहिए। चुनाव आते ही राजनीतिक रिश्ते और समीकरण बदलते दिखाई देते हैं। कहीं टिकट के साथ निष्ठा बदलती है तो कहीं टिकट नहीं मिलने पर रास्ता बदल जाता है। ऐसे में मतदाता के लिए उम्मीदवार की राजनीतिक प्रतिबद्धता को परखना भी जरूरी हो गया है। उसकी विचारधारा स्थायी है या राजनीतिक अवसर के साथ बदलती रही है, इस पर गौर करना चाहिए। जो उम्मीदवार बार-बार पार्टियां बदलता है, उसके राजनीतिक फैसलों और प्रतिबद्धता को लेकर मतदाताओं को गंभीरता से विचार करना होगा। हर उम्मीदवार भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर सकता है, लेकिन जनता के सामने यह लिखकर बताना भी जरूरी है कि वह वार्ड के कामों में पारदर्शिता रखेगा, विकास कार्यों की जानकारी सार्वजनिक करेगा और घटिया काम होने पर आवाज उठाएगा। ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों के संबंधों पर सवाल उठने पर जवाब देगा और पूरे पांच साल जनता से संपर्क बनाए रखेगा। मतदाता उम्मीदवार से यह जानना चाहे तो गलत नहीं होगा कि चुनाव लड़ने में इतना पैसा क्यों खर्च होता है और जीतने के बाद उस खर्च की भरपाई किस तरह होती है। यह सवाल भी अहम है कि उम्मीदवार पार्षद बनने आया है या वार्ड की सेवा करने के लिए। यदि वोट जाति, रिश्तेदारी, पैसे, व्यक्तिगत काम या दबाव के आधार पर पड़ेगा तो पांच साल बाद खराब व्यवस्था पर सवाल उठाने का हमारा नैतिक अधिकार भी कमजोर पड़ जाएगा। उम्मीदवार वही राजनीति करेगा, जिसकी उसे चुनाव में कीमत मिलेगी। यदि वोट काम, ईमानदारी और जवाबदेही के बदले मिलेगा तो राजनीति भी काम की ओर जाएगी। लेकिन पैसे, जाति, रिश्तेदारी और व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता मिली तो राजनीति भी उसी दिशा में आगे बढ़ेगी इसलिए इस चुनाव में अहम बात केवल यह नहीं कि कौन जीतेगा। असली फैसला यह होगा कि गजसिंहपुर का मतदाता किस तरह की राजनीति को जीत दिलाएगा।
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