लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान,संविधान की रक्षा का संकल्प और युवाओं को जागरूक करने का आह्वान:- भजनलाल शर्मा
June 26th, 2026 | Post by :- | 18 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन करते हुए उनके सम्मान एवं सुविधाओं में महत्वपूर्ण वृद्धि की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों को मिलने वाली मासिक सम्मान राशि ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,000 तथा चिकित्सा सहायता ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,000 करने की घोषणा की। अब उन्हें प्रतिमाह कुल ₹30,000 की सहायता प्राप्त होगी। साथ ही राजस्थान रोडवेज में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी प्रदान करने की घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को विदेशी शासन से मुक्त कराया, उसी प्रकार लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल के दौरान संविधान और लोकतंत्र को बचाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय देशवासियों को लोकतंत्र पर हुए सबसे बड़े हमले की याद दिलाने वाला ऐतिहासिक निर्णय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलने का काम किया। 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान की मूल भावना को बदल दिया गया, विपक्षी नेताओं और लोकतंत्र सेनानियों को जेलों में डाल दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई, अखबारों के संपादकीय तक खाली छोड़ने पड़े और न्यायपालिका पर भी दबाव बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने जेलों में अमानवीय यातनाएं सहन कीं, उनके परिवारों ने असंख्य कठिनाइयों का सामना किया, फिर भी वे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे।
उन्होंने कहा कि आज आपातकाल को 51 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन तुष्टिकरण, वंशवाद, भ्रष्टाचार और संविधान की मूल भावना को कमजोर करने वाली राजनीति से देश को सतर्क रहने की आवश्यकता है। लोकतंत्र सेनानियों की यह जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को उस दौर के संघर्ष, बलिदान और लोकतंत्र की रक्षा के महत्व से परिचित कराएं, ताकि भविष्य में कोई भी लोकतंत्र पर ऐसा हमला करने का साहस न कर सके।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल की मानसिकता आज भी कांग्रेस के भीतर जीवित है। उन्होंने कांग्रेस नेता अशोक गहलोत पर तंज कसते हुए उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष इन वेटिंग कहा तथा उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि आज इंदिरा गांधी होती तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा देती और बीजेपी के नेताओं को जेल में डाल देती इससे उनके इरादे स्पष्ट होते हैं कि यदि आज भी अवसर मिले तो वही दमनकारी सोच दोहराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि देश की युवा पीढ़ी को आपातकाल की सच्चाई और कांग्रेस की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता से अवगत कराना आवश्यक है।
मदन राठौड़ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका का भी स्मरण करते हुए कहा कि आपातकाल के समय संघ के कार्यकर्ताओं ने जेल भरो आंदोलन चलाया, स्वयं यातनाएं सहीं तथा जेलों में बंद लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों की सेवा और सहायता का दायित्व निभाया। अनेक स्वयंसेवकों को गिरफ्तार किया गया, उन पर वारंट जारी हुए और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़नाएं झेलनी पड़ीं, लेकिन उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा का संघर्ष जारी रखा।
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों मोहन जी बालाहाडी, बालगोपाल जी, हरिहर जी पारीक, ओ.पी. गुप्ता, सुरेश कुमार शर्मा तथा बाबूलाल शर्मा सहित अनेक लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया। अन्य लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी,लोकसभा सांसद मंजू शर्मा, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक अशोक परनामी, पूर्व सांसद एवं मंत्री नाथू सिंह गुर्जर, विधायक गोपाल शर्मा, विधायक बालमुकुंद आचार्य, भाजपा महामंत्री श्रवण बागड़ी, भूपेंद्र सैनी, पूर्व सांसद रामचरण बोहरा आदि मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।
मदन राठौड़ ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उनके त्याग और बलिदान को सदैव स्मरण रखा जाएगा तथा नई पीढ़ी को लोकतंत्र की रक्षा के इस गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का अभियान निरंतर जारी रहेगा।

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