गजसिंहपुर,(यश कुमार)। संत श्री आसाराम बापू की प्रेरणा से श्री योग वेदान्त सेवा समिति द्वारा परमानन्द डिग्री कॉलेज गजसिंहपुर में मंगलवार को मातृ-पितृ पूजन के कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम में नैतिक संस्कार सिंचन व सनातन संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा सर्वजन हिताय – सर्वजन सुखाय के भाव पर बल देते हुए माता-पिता एवं गुरूजनों का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया गया सर्वप्रथम छात्राओं द्वारा श्रद्धाभाव से अपने माता-पिता व गुरूजानों को उचित आसन पर मंत्रोच्चारण के साथ बैठाकर वंदन किया गया तथा माता-पिता को रोली-चावल का तिलक लगाकर तथा पुष्पवर्षा कर फूलमाला पहनाई गई उनकी 7 परिक्रमा कर विधिवत प्रणाम किया भावविभोर हृदय से माता-पिता व गुरूजनों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए स्नेहपूर्वक आशीर्वाद दिया तत्पश्चात् बच्चों ने माता पिता व गुरूजनों की आरती की तथा सभी ने एक दुसरे को मधुर प्रसाद खिलाया माता पिता व बच्चों के गले मिलने के दृश्य को देखकर सभी भाव विभोर हो गए तथा बरबस प्रेम से अश्रुधारा बह निकली कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्री योग वेदान्त सेवा समिति के प्रवक्ता ने ऐसे आयोजन की महत्वता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 28 विकासशील देशों में वेलेन्टाईन डे के दुष्प्रभाव पर सर्वे किया गया है जिसमें सामने आया कि मात्र 13 से 19 वर्ष की आयु में प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख 50 हजार कन्याऐं गर्भवती हो जाती है तथा उनमें से 5 लाख प्रतिवर्ष गर्भपात करवाती है बाकि 7 लाख 50 हजार कुवारी माताऐं बनकर माता-पिता, समाज व राष्ट्र पर बोझ बनती है तथा वेश्यावृति में लिप्त होना पडता है विश्वभर के विकासशील देशों की इस गंदगी से भारत तथा समुचे विश्व के निवासियों को बचाने के लिए संत श्री आसाराम बापू द्वारा वर्ष 2007 में मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया ताकि युवा पीढी पथभ्रष्ट होने की बजाय मातृ-पितृ पूजन करके संस्कारवान बन सके राज्य सरकार द्वारा 14 फरवरी को पूरे राजस्थान के विद्यालयों में मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने के निर्णय के लिए उन्होने राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मूलचंद भारद्वाज ने अपने हृदय के उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि माता पिता का जो हमारे ऊपर उपकार है उसको तो ब्रह्माजी की तराजू भी तोल नहीं सकती दुनिया का कोई कितना भी बडा सेवक हो तो भी माता पिता का ऋण नहीं चुका सकता माता पिता का पूजन वर्ष में एक बार 14 फरवरी को ही नही बल्कि नित्य करना चाहिए कार्यक्रम के प्रारम्भ में श्रीमद भागवत गीता का पूजन मन्त्रोंचार से किया गया इसके पश्चात तुलसी पूजन परिक्रमा व आरती के साथ किया गया व तुलसी पूजन 25 दिसम्बर को कैसे मनाए इसका क्या महत्व है नित्य तुलसी मॉ का पूजन सत्कार व कैसे तुलसी मॉ का सत्कार करें को श्री योग वेदान्त समिति के संजय पेडीवाल ने बच्चों को विस्तार से प्रयोगात्मक रूप से सिखाया बच्चों ने सदैव माता पिता व गुरूजनों का आदर सत्कार करने व उनकी आज्ञा पालन की प्रतिज्ञा की वक्ताओं ने इस कार्यक्रम की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए श्री योग वेदान्त सेवा समिति को साधुवाद दिया तथा कहा कि ऐसे कार्यक्रम साल में बार बार होने चाहिए इस पूजन में मुख्य रूप से गोल्डन पब्लिक सी सै. स्कूल, विवेकानन्द पब्लिक सी. सै. स्कूल, पॉपिन्स चिल्ड्रन वर्ल्ड स्कूल, मेट्रो पाठ्शाला व समरडेल्स सी सै स्कूल के छात्रों द्वारा इस कार्यक्रम में लगभग 500 बच्चों ने भाग लिया और अपने-अपने गुरूजनों के साथ पूजन किया ।





