गोरखपुर (एके जायसवाल), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं घोषणा किया था कि जाति आधारित जनगणना केंद्र सरकार कराएगी, घोषणा के बाद केन्द्र सरकार के महालेखाकार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जाति-आधारित जनगणना कराने हेतु 16 जून 2025 को आदेश जारी किया था। किन्तु केन्द्र सरकार किन्हीं लोगों के दबाव मे आकर जाति आधारित जनगणना कराने से कतरा रही है जाति-आधारित जनगणना कराने के बजाय 40 बिन्दुओं पर सर्वे कर रही है यहाॕ तक जाति-आधारित जनगणना कराने का जिक्र तक नहीं किया गया है।
खासकर पिछड़ों के साथ छल कर रही है तथा महिला आरक्षण बिल संसद सत्र के दौरान सत्ता एवं विपक्ष संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पास कर दिया है किंतु केंद्र सरकार किसी बड़े दबाव के कारण महिलाओं को आरक्षण का लाभ देना नही चाहती है केन्द्र सरकार महिला आरक्षण जानबूझकर लटका एवं उलझा दिया। केंद्र सरकार को यह पता था कि 240 सांसद ही चुनाव जीते है। जबकि पारसिमन बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत से ही बिल पास होगा इसीलिए महिला आरक्षण बिल के साथ ही परिसीमन जोड़ दिया जबतक परिसीमन बिल पास नही होगा तबतक महिला आरक्षण बिल लागू नही होगा। किन्तु केन्द्र सरकार चाहे तो एक झटके मे महिला आरक्षण बिल लागू हो जायेगा। सिर्फ केन्द्र सरकार परिसीमन बिल वापस लें तो महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलने लगेगा। अगर परिसीमन बिल वापस नही लिया तो महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने से केन्द्र सरकार कतरा रही है। मोदी आपके रणनीतिकारों ने पिछड़े वैश्यों सहित मेरे समाज को देश की मुख्य धारा से जोड़ने के बजाय गहरी खाई मे धकेल दिया है गहरी खाई से निकलने का उपाय किया जा रहा है। उक्त ब्यान अखिल भारतीय कलवार कलाल कलार जायसवाल महासभा के राष्ट्रीय महासचिव ध्रुवचन्द जायसवाल ने जारी की।
ध्रुवचन्द जायसवाल ने स्मरण करते हुए कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यह घोषणा की थी कि भाजपा की सरकार बनने पर 2 करोड़ युवाओं को केन्द्र सरकार नौकरी देगी, किसानों की आय (आमदनी) दो गुनी होगी, देश का काला धन जो बिदेशी बैकों मे जमा है भारत मे वापस लायेगे। भ्रष्टाचार समाप्त करेंगे ना खायेंगे ना खाने देंगे तथा देश नहीं झुकने दुंगा………! आगे कुछ नहीं लिखना चाहता हूँ मोदी आपने अनेकानेक वादा तथा घोषणा किया था एक भी वादा तथा घोषणा पूरा नहीं किया है। 2029 के लोकसभा चुनाव मे आपकी पार्टी को किस आधार पर पिछड़े, दलित, आदिवासी, युवाओं एवं महिलाएं अब किस आधार पर मतदान करें।
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