बार काउंसिल को यह गंभीरता से विचार करना चाहिए : न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना
September 5th, 2026 | Post by :- | 23 Views
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने कानूनी पेशे और बार काउंसिल की भूमिका को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और विचारणीय टिप्पणी की है। National Law University, Delhi के 13वें दीक्षांत समारोह में संबोधित करते हुए उन्होंने बार काउंसिल्स से आत्ममंथन करने का आह्वान किया और कहा कि किसी भी बार काउंसिल की वास्तविक ताकत केवल उसकी वैधानिक शक्तियों में नहीं, बल्कि अपने सदस्यों के बीच उसके प्रति पैदा होने वाले विश्वास और सम्मान में होती है।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि बार काउंसिल को यह गंभीरता से विचार करना चाहिए कि वह पेशेवर नैतिकता, स्वतंत्र Bar, न्यायपालिका की गरिमा, न्याय प्रशासन और Rule of Law को मजबूत करने में कितनी प्रभावी भूमिका निभा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मजबूत और स्वतंत्र Bar लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक है, क्योंकि वकील केवल अपने मुवक्किल के प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि न्याय व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के महत्वपूर्ण भागीदार भी होते हैं।
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति नागरत्ना ने Artificial Intelligence (AI) के बढ़ते प्रभाव पर भी महत्वपूर्ण चेतावनी दी। उन्होंने वकीलों को AI द्वारा तैयार किए गए काल्पनिक या फर्जी judgments और कानूनी citations के प्रति सावधान रहने की सलाह दी। तकनीक कानूनी शोध और काम को आसान बना सकती है, लेकिन अदालत के समक्ष किसी भी कानून, निर्णय या तथ्य को प्रस्तुत करने से पहले उसका स्वतंत्र और विश्वसनीय सत्यापन करना वकील की जिम्मेदारी है।
उन्होंने युवा वकीलों को केवल कानून की किताबों और judgments तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए judgment, negotiation, mediation, arbitration और practical problem-solving जैसी क्षमताओं को विकसित करने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार भविष्य का सफल वकील वही होगा जो केवल कानून जानता ही नहीं, बल्कि यह भी समझता है कि किसी विवाद को कब अदालत तक ले जाना है और कब बातचीत, mediation या settlement के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना बेहतर हो सकता है।
न्यायमूर्ति नागरत्ना का यह संदेश ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण माना जा सकता है जब कानूनी पेशे के सामने लंबित मुकदमों, न्याय में देरी, बढ़ती लागत, तकनीकी बदलाव और पेशेवर नैतिकता जैसी कई चुनौतियां मौजूद हैं। उनका संदेश केवल नए वकीलों के लिए नहीं, बल्कि पूरी legal fraternity और Bar institutions के लिए आत्ममंथन का अवसर देता है।
अब सवाल यह है कि क्या हमारी Bar Councils वास्तव में अपने सदस्यों का विश्वास और सम्मान अर्जित कर पा रही हैं? क्या बार संस्थाओं को अपनी कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पेशेवर नेतृत्व को लेकर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है?
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