महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री कार्यालयों के बार-बार निर्देशों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं
August 25th, 2026 | Post by :- | 57 Views

चंडीगढ़।              हरियाणा के अनेक युवाओं ने बार कौंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा,   चंडीगढ़ में अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट के लिए आवेदन किया हुआ है। इन आवेदनों पर ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी, नागालैंड के वर्ष 2007 के सत्र (2007–2010) की ग्रेजुएशन डिग्रियों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है।

छात्रों के अनुसार, अतिरिक्त सचिव, बार कौंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा, चंडीगढ़ ने यूजीसी की उपसचिव Ms. Neethu S. Thulaseedharan से दिनांक 01 अप्रैल 2022 को प्राप्त पत्र का हवाला देते हुए माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ में CWP No. 24649 of 2023 में एक शपथपत्र दाखिल किया है।

इसमें कहा गया है कि उक्त यूनिवर्सिटी को यूजीसी के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (DEB) द्वारा केवल वर्ष 2008-09 में डिस्टेंस मोड में एक वर्ष के लिए मान्यता प्राप्त थी।  इसी आधार पर यह कहा गया कि यूनिवर्सिटी का वर्ष 2007 का सत्र यूजीसी से अनुमोदित नहीं था।

इस संबंध में, एक छात्र के अनुरोध पर यूजीसी के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (DEB) द्वारा 20 नवंबर 2025 तथा 19 जून 2026 को स्पष्टीकरण दिया गया है कि दिनांक 01 अप्रैल 2022 का पत्र केवल वर्ष 2008-09 के डिस्टेंस मोड से संबंधित था,  यूनिवर्सिटी के नियमित मोड से नहीं। साथ ही, यूनिवर्सिटी के वर्ष 2007 सत्र का नियमित मोड यूजीसी के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (DEB) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

यूजीसी (मुख्यालय) ने एक छात्र के अनुरोध पर दिनांक 23.10.2025 को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि यूनिवर्सिटी नागालैंड राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन तथा यूजीसी के नियमों के तहत 18 सितंबर 2006 से नोटिफाइड है और विश्वविद्यालय नियमित मोड में डिग्री जारी करने के लिए अधिकृत थी।

यूजीसी (मुख्यालय) ने दिनांक 06.06.2025 को जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि यूजीसी की विशेष टीम द्वारा 29 व 30 जून 2010 को यूनिवर्सिटी का निरीक्षण किया गया था तथा निरीक्षण समिति की रिपोर्ट को यूजीसी चेयरमैन द्वारा 27 सितंबर 2010 को आयोग की 472वीं बैठक के आइटम नंबर 5.08 के तहत अनुमोदित किया गया था।  इसमें जुलाई 2007 से यूनिवर्सिटी में हुए छात्रों के दाखिलों को स्वीकार किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय ने वर्ष 2007 सत्र में 101 पाठ्यक्रमों में 13,233 छात्रों को दाखिला दिया तथा फीस के रूप में 21 करोड़ 62 लाख रुपये एकत्र किए। यूजीसी चेयरमैन के आदेश यूजीसी मुख्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित हैं।

निदेशालय उच्च शिक्षा, नागालैंड ने भी दिनांक 14.04.2026 को लिखित स्पष्टीकरण जारी किया है कि इस विश्वविद्यालय के कैंपस का उद्घाटन तत्कालीन एवं वर्तमान माननीय मुख्यमंत्री श्री नेफ्यू रियो द्वारा जून 2007 में किया गया था।  तदोपरांत,  जुलाई 2007 में यूनिवर्सिटी ने अपना पहला सत्र शुरू किया था। निदेशालय के अनुसार, इस यूनिवर्सिटी का वर्ष 2007 का सत्र नियमित मोड में यूजीसी द्वारा तथा यूनिवर्सिटी का वर्ष 2008 का सत्र डिस्टेंस मोड में अप्रूव्ड है।

छात्रों का आरोप है कि बार कौंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा, चंडीगढ़ के अतिरिक्त सचिव श्री मलकीत सिंह ने 1 अप्रैल 2022 के डिस्टेंस मोड से संबंधित पत्र को वर्ष 2007 के नियमित मोड के सत्र से जोड़कर इस सत्र के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में  एनरोलमेंट पर गलत तरीके से रोक लगाई हुई है।

छात्रों के अनुसार, उनके मामलों में कई स्तरों पर आपत्तियां उठाई गईं। इनमें उनकी ग्रेजुएशन डिग्री के  संबंध में शपथपत्र पर घोषणा पत्र लिया गया और संबंधित विश्वविद्यालय से सत्यापन करवाने के बावजूद, डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो से छात्रों की डिग्री एवं दाखिले से संबंधित पिछले 18 वर्षों की जानकारी मांगना तथा दूसरे राज्य मेघालय के निदेशालय उच्च शिक्षा के उस कार्यालय को पत्र लिखना शामिल है, जो शिक्षा नीति 2020 के बाद उपलब्ध ही नहीं है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय नागालैंड में स्थित होने के बावजूद दूसरे राज्य मेघालय के कार्यालय से जानकारी मांगी गई, जो गलत है।

यूनिवर्सिटी के वर्ष 2007 सत्र के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट पर पिछले चार वर्षों से रोक लगाए जाने के संबंध में भारत की महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा कानून एवं विधि मंत्रालय, भारत सरकार तथा चंडीगढ़ प्रशासक को उचित कार्रवाई के लिए बार-बार निर्देश दिए गए हैं। छात्रों का कहना है कि इन निर्देशों के बावजूद  पांच महीने  से अधिक समय बीतने के बाद भी कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई है।

यूजीसी मुख्यालय एवं डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो द्वारा इस मामले में स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद, छात्रों के अनुसार, अतिरिक्त सचिव द्वारा यूजीसी मुख्यालय के पत्रों की पुनः पुष्टि के लिए यूजीसी के अधीन डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (DEB) को अपने ही  मुख्यालय द्वारा जारी पत्रों को पुनः कन्फर्म करने के संबंध में लिखा गया है।

बार कौंसिल के अतिरिक्त सचिव द्वारा 27 जनवरी 2026 के पत्र में ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी, नागालैंड के रजिस्ट्रार से यूनिवर्सिटी के वर्ष 2007 सत्र एवं वर्ष 2008-09 सत्र से संबंधित 18 वर्ष पुरानी  अनेक जानकारियां एवं दस्तावेज मांगे गए तथा इसकी प्रतियां UGC-DEB, दूसरे राज्य मेघालय के उच्च शिक्षा निदेशालय और बार कौंसिल ऑफ इंडिया को भेजी गईं।

मुख्य सवाल यह है कि 27 जनवरी 2026 को माननीय हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्रीमती जयश्री ठाकुर की अध्यक्षता में बार कौंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा में चुनाव प्रक्रिया चल रही थी। ऐसे में उस दिन एनरोलमेंट  कमेटी की बैठक होना कैसे संभव था?

छात्रों का आरोप है कि इसी यूनिवर्सिटी के वर्ष 2008-09 में डिस्टेंस मोड से एक  वर्ष में ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को पिछले कई वर्षों से यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार से डिग्री तस्दीक करवाने के बाद ही अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर यह जानकारी मांगना कि भविष्य में यूनिवर्सिटी के वर्ष 2008 सत्र से संबंधित आवेदन आने की संभावना है, छात्रों के अनुसार, तथ्यों के विपरीत एवं गुमराह करने वाला पत्र है।

यदि अतिरिक्त सचिव, बार कौंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा, चंडीगढ़ के पास यूजीसी मुख्यालय, डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो एवं निदेशालय उच्च शिक्षा, नागालैंड से प्राप्त कोई लिखित आदेश है कि यूनिवर्सिटी का वर्ष 2007 सत्र (2007-2010) यूजीसी से  अन-अप्रूव्ड है, तो इस सत्र के छात्रों के आवेदनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। छात्रों का कहना है कि ऐसे किसी लिखित आदेश के बिना अतिरिक्त सचिव (लॉ भवन) द्वारा माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह शपथपत्र देना कि यूनिवर्सिटी का वर्ष 2007 सत्र यूजीसी से अप्रूव्ड नहीं है, अशोभनीय एवं कानूनन गंभीर रूप से आपत्तिजनक है।

 

.

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।