क्या न्यायपालिका जैसे संस्थान में लैंगिक उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ शिकायतों के लिए और अधिक स्वतंत्र एवं प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए
September 5th, 2026 | Post by :- | 18 Views
सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने न्यायपालिका में महिला जजों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें कई महिला जजों से उनके पुरुष सहयोगियों द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं और इसी वजह से उन्होंने अपनी किताब में इसे भारतीय न्यायपालिका का “गंदा राज़” बताया है।
उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में मौजूद पदानुक्रम और सामंती मानसिकता पर भी सवाल उठाए। अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह कुछ महिला जजों को वरिष्ठ पुरुष जजों के सामने अपमानजनक और अनुचित व्यवहार करने के लिए मजबूर किया जाता था।
उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं केवल व्यक्तिगत दुर्व्यवहार का मामला नहीं हैं, बल्कि न्यायिक संस्थानों में मौजूद शक्ति-संतुलन और जवाबदेही से भी जुड़ी हुई हैं।
वहीं, उन्होंने संविधान को लेकर अपनी उम्मीद भी व्यक्त की और कहा कि जब तक नागरिक भारत के संविधान की रक्षा कर सकते हैं, तब तक लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा की उम्मीद बनी रहती है।

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