जातिगत जनगणना करायें, लटकाने, भटकाने व उलझाने का वक्त नही -ध्रुवचन्द जायसवाल
August 31st, 2026 | Post by :- | 23 Views

गोरखपुर (एके जायसवाल)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करबद्ध प्रार्थना है कि पारदर्शिता तरीके से जाति आधारित जनगणना कराने के लिए पिछड़ों दलितों आदिवासियो के जातियों की सरकारी गजट सूची उपलब्ध है सबसे पहले चार(4) कालम बनाये 1.सवर्ण 2.पिछड़ा 3.दलित 4.आदिवासी पहले जनगणना कर्मी यह पूछे आप सवर्ण है, पिछड़े हैं, दलित है या आदिवासी हैं उनके बताने पर सरकारी गजट से मिलाने के बाद जनसंख्या दर्ज करें तभी पिछड़ों को लाभ मिलेगा स्मरण रहे कि जनगणना अनुसार पिछड़ों की जनसंख्या 52% थी दलितों एवं आदिवासियो की 22.5% थी। 1931 जन गणना बाद कई अन्य जातियाँ पिछड़े होने के कारण जुड़े इसीलिए जनसंख्या बढी़ यूपी, बिहार, सहित कुछ प्रदेशों में 55% से 60% तक हो गई इसीलिए जातिगत जनगणना करने की मांग जोर पकड़ रही है।

इसीलिए जाति आधारित जनगणना करने की शुरुआत हुई है कि आरक्षण विरोधी भाजपा के रणनीतिकारों एवं आरक्षण विरोधी ब्यूरोक्रेसी जातिगत जनगणना करने मे अवरोध उत्पन्न कर रही है इसीलिए 40 बिंदुओ पर सर्वे करने का कुचक्र रचा है जिससे जातिगत जनगणना मकर-जाल में फंस उलझ कर नि:प्रभावित हो जाए| लटकाने भटकाने उलझाने का कार्य केन्द्र सरकार नहीं करे क्योंकि 7 राज्यों के चुनाव प्रभावित होने से कोई रोक सकता है 7 राज्यो के खास कर यूपी मे पिछडों की सख्या 55% से 60% जनसंख्या के आस-पास है इसका संज्ञान केन्द्र सरकार को लेनी चाहिए तथा गरीब सवर्णो के साथ भी अन्याय किया है समय आने पर तर्क संगत डाटा प्रस्तुत होगा मा० मोदी जी आपने खुद घोषणा किन परिस्थितियो मे किया था सबको याद है महालेखाकार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जनगणना कराने का16जून 2025 को आदेश जारी किया था किन्तु अब शुरु हुआ।उक्त ब्यान अखिल भारतीय कलवार कलाल कलार जायसवाल महासभा के राष्ट्रीय महासचिव ध्रुवचन्द जायसवाल ने जारी किया।

ध्रुवचन्द जायसवाल ने कहा कि स्मरण रहे कि 1931 के जनगणना के अनुसार पिछड़ों की जनसंख्या 52% था किन्तु मात्र 27% प्रतिशत तक ही आरक्षण मिला है कब-तक अन्याय सहेंगे सहनें की सीमा समाप्त हुई अब हक चाहिए उच्च शिक्षण संस्थानों,उच्च चिकित्सा संस्थानों एवं जुडिशरी में न्यायाधीशो की बात छोड़िए सरकारी वकील तक पिछड़ों की संख्या लगभग नग्ण है कई महत्वपूर्ण विभागों मे पिछड़ों की संख्या 27% प्रतिशत से बहुत कम है। इसलिए पिछड़े समाज के कई संगठनों व्दारा कई दशकों से जातिगत जनगणना की मांग कर रहे थे। जातिगत जनगणना के प्रारूप मे पिछड़ों का कहीं उल्लेख नहीं है पिछड़ों मे संशय/ ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न हो रही है मोदी स्वंय संज्ञान लें जो गलती कांग्रेस ने किया राहुल ने स्वीकार किया वह गलती आप मत दोहराइये प्रारूप में परिवर्तन करायें।

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