जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । जयपुर पुलिस द्वारा साइबर वित्तीय अपराधों, फर्जी कॉल सेंटरों एवं सरकारी ऑनलाइन सेवाओं के नाम पर आमजन से धोखाधड़ी करने वाले संगठित गिरोहों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के क्रम में थाना रामनगरिया, जयपुर पूर्व, सी.एस.टी. आयुक्तालय जयपुर एवं साइबर पुलिस थाना, जयपुर तकनीकी सहायता से संयुक्त कार्रवाई में जगतपुरा स्थित ए.बी.एस. प्लाजा, 7 नम्बर बस स्टैण्ड के पास, प्रथम तल पर संचालित फर्जी ई-मित्र रिटेलर आईडी कॉल सेंटर/साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का खुलासा किया गया। इस संबंध में थाना रामनगरिया, जयपुर पूर्व में प्रकरण संख्या 257/2026 धारा 318(4), 316(2), 112(2), 61(2) बी.एन.एस. 2023 एवं 66C, 66D आई.टी. एक्ट में दर्ज किया गया है। श्री सचिन मित्तल, IPS, पुलिस आयुक्त, जयपुर ने बताया कि जयपुर पुलिस साइबर अपराधों के विरुद्ध केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध की पूरी डिजिटल, वित्तीय एवं संगठित श्रृंखला को चिन्हित कर रही है। फर्जी पोर्टल, फर्जी सेवा-प्रदाता, QR Code आधारित भुगतान, किराये के कॉल सेंटर, संदिग्ध सिम, बैंक खाते, डिजिटल पहचान एवं नागरिकों के डेटा के दुरुपयोग जैसे सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि ई-मित्र, CSC, रिटेलर आईडी, कियोस्क, फ्रेंचाइजी, सरकारी सेवा, रोजगार अथवा ऑनलाइन लाइसेंस के नाम पर आने वाली किसी भी कॉल, लिंक, WhatsApp संदेश, QR Code अथवा निजी खाते में भुगतान करने से पूर्व आधिकारिक सत्यापन अवश्य करें। श्री ओम प्रकाश, IPS, विशेष पुलिस आयुक्त, जयपुर ने बताया कि सी.एस.टी. टीम को प्राप्त आसूचना का त्वरित फील्ड सत्यापन कराया गया। सत्यापन में सूचना प्रथमदृष्टया विश्वसनीय, प्रामाणिक एवं कार्रवाई योग्य पाई गई। डिजिटल साक्ष्य नष्ट/डिलीट होने, संदिग्ध व्यक्तियों के मौके से फरार होने तथा अपराध के निरंतर संचालन की संभावना को देखते हुए थाना रामनगरिया पुलिस, सी.एस.टी. एवं साइबर पुलिस थाना के मध्य समन्वय स्थापित कर तत्काल संयुक्त कार्रवाई की गई।
दिनांक 25.05.2026 को सी.एस.टी. आयुक्तालय जयपुर को थाना रामनगरिया क्षेत्र में स्थित ए.बी.एस. प्लाजा, 7 नम्बर बस स्टैण्ड, जगतपुरा, जयपुर के प्रथम तल पर ई-मित्र सेवा की रिटेलर आईडी देने के नाम पर साइबर ठगी किए जाने की आसूचना प्राप्त हुई। सूचना के अनुसार उक्त स्थान पर युवक-युवतियां लैपटॉप एवं मोबाइल फोन के माध्यम से कॉलिंग कर आमजन को ई-मित्र रिटेलर आईडी दिलवाने का प्रलोभन दे रहे थे तथा QR Code के माध्यम से राशि प्राप्त की जा रही थी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना रामनगरिया पुलिस टीम द्वारा सी.एस.टी. टीम एवं साइबर पुलिस थाना की तकनीकी सहायता के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई। मौके पर कार्यालयनुमा कमरे में 05 युवक एवं 05 युवतियां लैपटॉप और मोबाइल फोन के माध्यम से कॉलिंग कार्य करते हुए पाए गए। लैपटॉप स्क्रीन पर नाम-मोबाइल नंबरों की डेटा शीट उपलब्ध थी, जिसके आधार पर लोगों को कॉल कर ई-मित्र रिटेलर आईडी दिलवाने का प्रलोभन दिया जा रहा था।
*अपराध की कार्यप्रणाली*
प्रारम्भिक पूछताछ एवं मौके से प्राप्त डिजिटल सामग्री से सामने आया कि गिरोह द्वारा आमजन को ई-मित्र सेवा की रिटेलर आईडी उपलब्ध करवाने का झांसा देकर राशि प्राप्त की जा रही थी। इसके लिए कथित रूप से CSCeMitraKendra.com/login नामक पोर्टल/वेबसाइट, साझा ईमेल आईडी, नाम-मोबाइल नंबरों की डेटा शीट, अलग-अलग मोबाइल नंबरों, WhatsApp पर बनाए गए “Payment Group” और QR Code आधारित भुगतान व्यवस्था का उपयोग किया जा रहा था। कॉल पर संपर्क होने वाले व्यक्तियों को ई-मित्र रिटेलर आईडी दिलवाने का विश्वास दिलाया जाता था। इच्छुक व्यक्तियों से QR Code/UPI के माध्यम से भुगतान प्राप्त किया जाता था। प्रारम्भिक तथ्यों के अनुसार भुगतान के बाद उपलब्ध करवाई गई कथित आईडी से वास्तविक ई-मित्र सेवा उपलब्ध नहीं होती थी, बल्कि लोगों को धोखे में रखकर राशि हड़पने का उद्देश्य था।
*कथित मुख्य संचालक एवं फरार संदिग्ध की तलाश*
पूछताछ में एक कथित मुख्य संचालक/मुख्य संदिग्ध की भूमिका सामने आई है, जिसके द्वारा कार्यालय सेटअप, लैपटॉप, मोबाइल, सिम, पोर्टल/वेबसाइट, डेटा, QR Code एवं भुगतान व्यवस्था उपलब्ध करवाए जाने की बात सामने आई है। यह भी सामने आया कि कार्यालय का स्थान गिरफ्तार अभियुक्तों में से एक के नाम से किराये पर लिया गया था तथा कार्यरत व्यक्तियों को वेतन/कमीशन के आधार पर कार्य करवाया जा रहा था।
कथित मुख्य संचालक मौके से अनुपस्थित/फरार पाया गया है। उसकी गिरफ्तारी हेतु संभावित ठिकानों, संपर्क सूत्रों, सहयोगी नेटवर्क, उपयोग में लिए गए वाहन, मोबाइल कनेक्टिविटी, वित्तीय लिंक एवं डिजिटल footprints के आधार पर तलाश की जा रही है। फरार संदिग्ध के संभावित hideouts पर दबिश/तलाश की कार्रवाई जारी है।
*आमजन के लिए सावधानी संदेश*
जयपुर पुलिस आमजन से अपील करती है कि ई-मित्र, CSC, सरकारी सेवा, रिटेलर आईडी, कियोस्क, फ्रेंचाइजी, नौकरी या ऑनलाइन लाइसेंस के नाम पर आने वाली कॉल, WhatsApp लिंक, निजी QR Code, UPI ID या संदिग्ध वेबसाइट से सावधान रहें। ई-मित्र कियोस्क/रिटेलर आईडी के लिए केवल DoIT के अधिकृत ई-मित्र पोर्टल/ऐप, SSO ID अथवा अधिकृत LSP के माध्यम से ही आवेदन करें। भुगतान करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर भुगतान की पुष्टि करें। साइबर ठगी की आशंका होने पर तत्काल 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।





