राजस्थान

(युवाओं को सनातन की वैज्ञानिकता बताये:- विधानसभा अध्यक्ष) सनातन संवाद में मंदिर प्रबंधन,सामाजिक व्यवस्था एवं जनजागरण जैसे विषयों पर हुआ व्यापक मंथन

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा है कि युवाओं को सनातन की वैज्ञानिकता बताएं। रामायण और गीता के अध्ययन के लिए युवाओं को प्रेरित करें। सनातन पर गहन मंथन के साथ व्यावहारिक पहल की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सनातन के माध्यम से सभी समाजों को जोड़ें। श्री देवनानी ने सनातन संवाद को सामायिक विषय बताया और कहा कि सनातन शाश्वत है, इसलिए इस संवाद को अनन्त रखा जाये। सनातन को कोई खत्म नहीं कर सका है और न ही कोई कर सकेगा। उन्‍होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से सनातन बढेगा। श्री देवनानी ने संस्कृति युवा संस्था द्वारा आयोजित सनातन संवाद का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। स्‍पीकर श्री देवनानी ने कहा कि सनातन संस्कृति एवं सामाजिक व्यवस्था, समाज-परिवार व्यवस्था और वर्तमान समय में सनातन मूल्यों की प्रासंगिकता, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण एवं जनजागरण जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा की आवश्यकता है। समारोह के मुख्य अतिथि स्पीकर श्री देवनानी ने कहा कि सनातन संस्कृति हमारी पहचान और समाज की आधारशिला है। इसे सशक्त बनाए रखने के लिए संवाद, जागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। ऐसे संवाद समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरूण चतुर्वेदी ने कहा कि गृहस्थ परंपरा से संचालित मंदिर आज भी समाज में एक सशक्त, जीवंत और अनुकरणीय व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं। परिवार आधारित सेवा परंपरा में श्रद्धा, उत्तरदायित्व, निरंतरता और पारदर्शिता का संतुलित समन्वय देखने को मिलता है, जो मंदिरों को समाज से सीधे जोड़ता है।
सनातन संवाद के आयोजक और संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा कि समाज में संवाद और समन्वय की आवश्यकता है। राज्य में आज अनेक स्थानों पर गृहस्थ/परिवार आधारित सेवा परंपरा सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। कार्यक्रम संयोजक पंडित राजकुमार चतुर्वेदी ने बताया कि सनातन संवाद को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी इसी प्रकार के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
संस्कृति युवा संस्था के संरक्षक श्री एच.सी. गणेशिया ने कहा कि सनातन संवाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सतत विचार प्रक्रिया है। इस अवसर पर आचार्य संत श्री राम रिछपाल दास त्रिवेणी धाम, संत श्री धन्ना पीठाधीश्वर बजरंग देवाचार्य, संत समाज के अध्यक्ष श्री सियाराम दास, शुक्र सम्प्रदाय आचार्य श्री अलबेली माधुरी शरण, पंच खंड पीठाधीश्वर स्वामी श्री सोमेन्द्र, स्वामी श्री मोनू अमरापुर, खोले के हनुमान जी के श्री बी एम शर्मा, आचार्य श्री राजेश्वर, श्री महेन्द्र चौहान खाटू धाम एवं श्री स्वामी योगेन्द्रनाथ, श्रीमती ज्योति खंडेलवाल, श्री पुनीत कर्णावट उपस्थित रहे और सभी ने अपने विचार साझा किये।

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