राजस्थान

सुरों और संवेदना के समावेशन के साथ हुआ ‘आयो बसंत’ का बसंती आग़ाज़

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । डेल्फिक काउंसिल ऑफ राजस्थान द्वारा वेस्ट ज़ोन कल्चरल सेंटर, नॉर्थ ज़ोन कल्चर सेंटर एवं उस्ताद इमामुद्दीन ख़ान डागर म्यूज़िक एंड कल्चर सोसायटी के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘आयो बसंत’ का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को जवाहर कला केंद्र, जयपुर में हुआ। यह महोत्सव भारतीय कला-संस्कृति की जीवंत परंपराओं को समकालीन रचनात्मक अभिव्यक्तियों से जोड़ने वाला एक सशक्त मंच बनकर उभरा।
महोत्सव के पहले दिन प्रातः कृष्णायन सभागार में आयोजित रील मेकिंग एवं मोबाइल सेल्फ़ी वर्कशॉप में युवाओं और कला-प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कलाकार नीरज सरना द्वारा संचालित इस कार्यशाला में डिजिटल माध्यमों के ज़रिये विचारों, भावनाओं और कला को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के आधुनिक तरीकों पर संवाद हुआ। शाम का सत्र जवाहर कला केंद्र के रंगायन सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में ग्रामीण विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती श्रेया गुहा ने अतिथियों, कलाकारों एवं दर्शकों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘आयो बसंत’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि संवेदना, समावेशन और रचनात्मक चेतना का उत्सव है। नॉर्थ ज़ोन कल्चर सेंटर के निदेशक फुरकान खान ने भारतीय शास्त्रीय कलाओं, युवा प्रतिभाओं और नवाचार को प्रोत्साहित करने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। संगीत संध्या में संतूर और बांसुरी की सुरमयी जुगलबंदी ने श्रोताओं को भावलोक में पहुँचा दिया। युवा संतूर वादक श्री दिव्यांश हर्षित श्रीवास्तव एवं बांसुरी साधक श्री राग यमन की प्रस्तुति को तबले पर श्री ईशान शर्मा और घटम पर श्री वरुण राजशेखरन की सधी हुई संगति ने प्रभावशाली ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। कार्यक्रम का भावनात्मक शिखर रहा ‘वी आर वन’ (दिव्यांगजन) समूह की व्हीलचेयर डांस प्रस्तुति। गणेश वंदना से आरंभ होकर शिव तांडव स्तोत्र पर आधारित शास्त्रीय फ़्यूज़न, व्हीलचेयर एक्रो-योगा तथा देशभक्ति से ओतप्रोत समापन प्रस्तुति ने दर्शकों को गहराई तक भावविभोर कर दिया। उल्लेखनीय है कि यह समूह हाल ही में इंडियाज़ गॉट टैलेंट जैसे राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुका है। महोत्सव के प्रथम दिवस की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय एकता का सशक्त माध्यम भी है। उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों ने ‘आयो बसंत’ को सुरों,संवेदना और सौहार्द का उत्सव बताते हुए इसकी सराहना की।

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