Uncategorized राजस्थान

दोनो कॉल सेन्टरो में कुल 49 पुरुष एंव 11 महिलाओ सहित कुल 60 लोग गिरफ्तार

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार ) । पुलिस आयुक्त जयपुर सचिन मित्तल (IPS) ने बताया कि जयपुर शहर में चल रहे फर्जी कॉल सेन्टरो व साईबर फ्राड की गतिविधियो पर अकुंश लगाने हेतु श्री राहुल प्रकाश (IPS) स्पेशल पुलिस आयुक्त को निर्देशित कर टीम गठित करने हेतु कहा गया था। जिसकी पालना में पुलिस उपायुक्त जिला जयपुर पूर्व श्री संजीव कुमार नैन (IPS) के निर्देशन में फर्जी कॉल सेन्टरो की घटनाओ व साईबर फ्राड कि गतिविधियो पर अकुंश लगाने हेतु श्री आदित्य पूनियां सहायक पुलिस आयुक्त मालवीय नगर जयपुर पूर्व व श्री विनोद शर्मा सहायक पुलिस आयुक्त सांगानेर जयपुर पूर्व के सुपरविजन में श्री विजयपाल एसआई आईसी थाना मालवीय नगर जिला जयपुर पूर्व व श्री राजेन्द्र शर्मा थानाधिकारी पुलिस थाना प्रताप नगर जिला जयपुर पुर्व व श्री चन्द्रभान सिंह थानाधिकारी पुलिस थाना रामनगरिया जिला जयपुर पुर्व के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। दिनांक 19.11.25 को पुलिस थाना मालवीय नगर जिला जयपुर पुर्व के शिवानंद मार्ग पर प्लॉट ए-265 होटल HOTEL THE SPARK INN एंव पुलिस थाना प्रताप नगर जिला जयपुर पुर्व सरस्वती अपार्टमेन्ट के सामने प्लाट नम्बर 160/05 सेक्टर 16 प्रतापनगर जयपुर पूर्व में मुखबिर खास की इत्तला दी गई कि वहाँ बड़ी संख्या में एक कॉल सेन्टर की आड मे अमेरिकी नागरिको से साईबर क्राईम करने हेतु एक गिरोह काम करता है। इस गिरोह के नम्बर अमेरिकी नागरिको के द्वारा अमेजॉन एंव एप्पल कस्टमर केयर नम्बर सर्च किये जाने पर ब्राउजर पर सामने आते हैं। कस्टमर इन नम्बरो पर कॉल कर अपनी विभिन्न समस्याओ जैसे डिलीवरी गल्त एड्रेस पर हो जाना, रिटर्न का रिफण्ड ना मिलना, ऑडर का अपने आप कैसिंल हो जाना, गलत ऑडर डिलीवर हो जाना, अकाउण्ट ब्लॉक हो जाना, पेमेन्ट अनसक्शेसफुल दिखाना, गिफ्ट कार्ड का काम ना करना, इत्यादि के बारे में बताता है, जिसके पश्चात गिरोह के सदस्य जिन्हे डायलर कहा जाता है कॉल रिसीव करते है तथा कस्टमर को उसकी समस्या का कारण उसके बैंक अकाउण्ट में गडबडी होना बताते है तथा उसका कॉल समस्या के समाधान हेतु डायवर्ट कर गिरोह के सदस्य जिन्हे क्लोजर कहा जाता है को ट्रांसफर करते है, जो अपने आप को कभी बैंक का कर्मचारी बताते है और कस्टमर से उसकी बैंक एंव कार्ड डिटेल प्राप्त कर लेते है। तथा नया अकाउण्ट बनाने हेतु विवश कर देते हैं, कस्टमर को यह प्रतीत होता है कि उसने नया बैंक अकाउण्ट खोल लिया है लेकिन यह अकाउण्ट गिरोह के सदस्यो का ही फर्जी बैंक अकाउण्ट होता है, उसके पश्चात धोखाधड़ी पुर्वक कस्टमर के पुराने बैंक अकाउण्ट से पैसा इस नये फर्जी बैंक अकाउण्ट में ट्रांसफर करवा लिया जाता है। अन्य तरीके से जिसमे गिरोह का क्लोजर जो अमेरिकी सरकारी सस्था का कर्मचारी बनकर कस्टमर से बात करता है तथा कस्टमर को उसके बैंक अकाउण्ट में आई रुकावटो का कारण मनी लाड्रिग, चाईल्ड प्रोनोग्राफी इत्यादि बताता है तथा कस्टमर को डराने एंव विश्वास दिलाने हेतु अमेरिकी कोर्ट, एफबीआई, आईटी विभाग एंव अन्य सरकारी संस्थाओ के फर्जी नोटिस कस्टमर को भेजता है तथा कस्टमर को अपना पैसा अपने पुराने अकाउण्ट से दुसरे फर्जी अकाउण्ट में डालने पर विवश कर देता है। गिरोह के सदस्यो द्वारा पैसा फर्जी अकाउण्ट में आने के बाद क्रिप्टो केरेन्सी एंव हवाला इत्यादि से पैसा अपने पास प्राप्त किया जाता है।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *