(जयपुर नगर निगम में हवामहल-अमेर जोन का बड़ा घोटाला) उपायुक्त सीमा चौधरी और जेईएन अंशुल जैन पर अवैध निर्माण को बचाने का आरोप
जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । जयपुर नगर निगम के हेरिटेज हवामहल-अमेर जोन में कथित भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। पूर्व उपायुक्त दिलीप कुमार भम्भानी द्वारा सील की गई एक अवैध व्यावसायिक बिल्डिंग को लेकर वर्तमान उपायुक्त सीमा चौधरी और जूनियर इंजीनियर (जेईएन) अंशुल जैन पर गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने मिलीभगत से असली सीजर नोटिस को गायब कर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए, जिससे अवैध निर्माणकर्ता को लाखों रुपये का अनुचित लाभ पहुंचा और सरकारी राजकोष को चूना लगाया गया। हवामहल-अमेर जोन में स्थित एक अनाधिकृत बेसमेंट सहित पांच मंजिला बिल्डिंग को तत्कालीन उपायुक्त दिलीप कुमार भम्भानी ने अवैध व्यावसायिक निर्माण घोषित कर सीजर आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत बिल्डिंग पर नोटिस चस्पा कर सील कर दी गई थी। लेकिन,जेईएन अंशुल जैन ने कथित रूप से अपनी चालाकी से मूल सीजर आदेश को गायब कर दिया और उसी क्रमांक,संख्या एवं तारीख वाले दूसरे फर्जी आदेश को तैयार करवाया। इसमें दिलीप भम्भानी के हूबहू नकली हस्ताक्षर भी जोड़े गए। सूत्रों ने बताया कि उपायुक्त सीमा चौधरी और जेईएन अंशुल जैन ने साजिश रचकर अवैध निर्माणकर्ता से मिलीभगत की, जिससे बिल्डिंग को फिर से खोलने में आसानी हुई। इस घोटाले में बिल्डिंग शाखा के कुछ सफाई कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ में सहयोग किया। अनुमानित नुकसान लाखों रुपये का है, जो सीधे सरकारी खजाने को प्रभावित करता है। जब इस मुद्दे पर नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क साधा गया, तो कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली। उपायुक्त सीमा चौधरी ने फोन पर बात करने से इनकार कर दिया, जबकि जेईएन अंशुल जैन अनुपलब्ध रहे। पूर्व उपायुक्त दिलीप कुमार भम्भानी ने संक्षिप्त टिप्पणी में कहा, “मैंने जो आदेश जारी किया था, वह पूरी तरह वैध था। अगर कोई छेड़छाड़ हुई है, तो यह जांच का विषय है।”
शहरी विकास विशेषज्ञ डॉ. राजेश शर्मा ने कहा, “नगर निगम जैसे संगठनों में दस्तावेजों की हेराफेरी आम समस्या है, लेकिन यह मामला साफ मिलीभगत का उदाहरण है। ऐसी घटनाएं हेरिटेज जोन की अखंडता को खतरे में डालती हैं। तत्काल जांच जरूरी है।” यह मामला अब उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। लोकायुक्त या एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) द्वारा जांच की मांग तेज हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उछाला है, जहां #JaipurCorruption और #HawaMahalScam जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह जयपुर नगर निगम के हेरिटेज जोन में कार्यरत अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।





