गरियाबंद में भक्तिभाव से सजी बहुड़ा यात्रा गूंजे जयकारे मौसीबाड़ी से निजधाम लौटे जगत के नाथ 
July 6th, 2025 | Post by :- | 41 Views

गरियाबंद _श्रावण मास की पावन बेला में गरियाबंद भक्तिमय हो उठा जब जगत के पालनहार भगवान श्रीजगन्नाथ अपनी मौसी के घर से अपने निजधाम श्रीमंदिर की ओर लौटे नौ दिवसीय विश्राम के बाद भगवान बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ जब वे रथ पर सवार होकर बहुड़ा यात्रा पर निकले तो पूरा शहर हरि नाम के उद्घोष से गूंज उठा गरियाबंद में दोपहर 3 बजे जैसे ही यात्रा आरंभ हुई श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जय जगन्नाथ के नारों के बीच ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्तों की टोलियाँ झूम उठीं रथ मार्ग को भव्य रूप से सजाया गया था जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई और शुद्ध जल से रथों का अभिषेक हुआ श्री जगन्नाथ परिवार युवा बल समिति के सदस्यों ने प्रेस वार्तालाप पर लोकहित एक्सप्रेस न्यूज़ संवाददाता को बताया यह आयोजन केवल एक परंपरा नहीं बल्कि श्रद्धा और आस्था का जीवंत प्रमाण है समिति हर वर्ष इस उत्सव को और दिव्य रूप देने का संकल्प लेती है भगवान की कृपा से यह आयोजन पूरी भक्ति और समर्पण भाव से सम्पन्न हुआ छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों में भी बहुड़ा यात्रा की झलक देखने को मिली सुबह से मंदिरों में भजन-कीर्तन आरती और विशेष पूजा-पाठ का आयोजन हुआ रथ गर्भगृह में पहुंचने के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ योगनिद्रा में प्रवेश करेंगे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार जब भगवान जगन्नाथ चीर निद्रा में चले जाते हैं तब पांच महीने तक सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है यह काल देवशयन एकादशी से देवउठनी एकादशी तक का माना जाता है जब प्रभु की नींद टूटती है तभी से शुभ कार्यों जैसे तुलसी विवाह शालिग्राम विवाह आदि पुनः आरंभ होते हैं बहुड़ा यात्रा का धार्मिक महत्व

बहुड़ा’ ओड़िया भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है वापसी यह यात्रा भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का समापन करती है जहां रथ यात्रा में भगवान मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) की ओर जाते हैं वहीं बहुड़ा यात्रा में वे अपने मूल निवास लौटते हैं तीनों रथों भगवान बलभद्र का तालध्वज देवी सुभद्रा का दर्पदलन और भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष आज दक्षिण दिशा की ओर मुड़कर श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान कर चुके हैं रास्ते भर श्रद्धालुओं ने न केवल दर्शन किए बल्कि भक्ति रस में सराबोर होकर कीर्तन नृत्य और सेवा में भाग लिया। इस दिव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक चेतना को जागृत किया बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का संदेश भी दिया।

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