शिविरों में उपमंडल विधिक सेवा समिति, नारायणगढ़ के चेयरमैन एवं उपमंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) श्री चेतेश गुप्ता तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डॉ. जितेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।
October 28th, 2026 | Post by :- | 15 Views

नारायणगढ़/अंबाला :अशोक शर्मा।
उपमंडल विधिक सेवा समिति (एसडीएलएससी), नारायणगढ़ द्वारा बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों और कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत नारायणगढ़ के माइंड ट्री विद्यालय तथा राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया।
शिविरों में उपमंडल विधिक सेवा समिति, नारायणगढ़ के चेयरमैन एवं उपमंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) श्री चेतेश गुप्ता तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डॉ. जितेंद्र कुमार भी क्रमश: मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि जिला एवं उपमंडल विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, साइबर सुरक्षा, बुलिंग तथा किसी भी प्रकार के शोषण से बचाव के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें और किसी भी अनुचित स्थिति में बिना किसी झिझक के अपने अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों से सहायता प्राप्त कर सकें। साथ ही, बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाने और उनके सर्वांगीण विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी इन कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य है।
इस दौरान पैनल अधिवक्ता कुनाल गर्ग और गुरमीत सिंह ने रिर्सोस पर्सन के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों तथा किसी भी प्रकार की परेशानी की स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
शिविरों के दौरान विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान, साइबर सुरक्षा, सहपाठियों द्वारा परेशान करने अथवा डराने-धमकाने (बुलिंग) से बचाव और नैतिक मूल्यों के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी अनुचित व्यवहार या परेशानी की स्थिति में बिना झिझक अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों को जानकारी देनी चाहिए।
कार्यक्रम में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों और विधिक विशेषज्ञों के बीच संवाद भी हुआ। दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण तथा अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने इस जागरूकता पहल में सहयोग दिया।
इन शिविरों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उन्हें सुरक्षित वातावरण के महत्व से परिचित करवाना तथा किसी भी प्रकार के शोषण, साइबर अपराध और बुलिंग के विरुद्ध सजग रहने के लिए प्रेरित करना रहा।

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