अशोक गहलोत का बयान) अनिवार्य एफआईआर प्रणाली हटाने से बढ़ी मुसीबतें, जयपुर कमिश्नरेट के बाहर धरने पर सरकार को घेरा
October 20th, 2026 | Post by :- | 16 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर कमिश्नरेट में एनएसयूआई छात्र नेता रितु बराला के मामले में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज न किए जाने और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के धरने पर बैठने को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि उनके कार्यकाल की तरह ‘अनिवार्य एफआईआर’ (Compulsory FIR) का नियम लागू रहता, तो आज कांग्रेस अध्यक्ष सहित तमाम नेताओं को धरने पर बैठने की नौबत नहीं आती।
“अनिवार्य एफआईआर हटने से बढ़ी गरीबों और पीड़ितों की मुश्किलें”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने बयान में गहलोत ने कहा कि उनके कार्यकाल में अनिवार्य एफआईआर का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया था। इससे गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए धक्के नहीं खाने पड़ते थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा सरकार ने उस व्यवस्था को क्यों हटाया? गहलोत ने आरोप लगाया कि इस नियम के हटने के बाद से थानों की स्थिति बदतर हो गई है और पीड़ितों को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।
“तफ्तीश पुलिस का काम, एफआईआर दर्ज करने में क्या परेशानी?”
गहलोत ने कहा कि एफआईआर दर्ज करना और मामले की तफ्तीश करना पुलिस का काम है। प्राथमिक स्तर पर एफआईआर दर्ज करने में किसी को क्या तकलीफ होनी चाहिए? उन्होंने कहा, “अगर आपको लगता है कि एफआईआर में दम नहीं है, तो तफ्तीश के बाद अंतिम रिपोर्ट (FR) लगानी है या चार्जशीट पेश करनी है, यह बाद की बातें हैं।”
उन्होंने चिंता जताई कि आज हालात ऐसे बन गए हैं कि बलात्कार जैसी गंभीर घटनाओं में भी पीड़ितों पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे पूरे सिस्टम में गड़बड़ियां पैदा हो रही हैं।
“प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को धरना देना पड़ना दुर्भाग्यपूर्ण”
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के धरने पर बैठने को सरकार के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल के अध्यक्ष को न्याय के लिए खुद धरने पर बैठना पड़ रहा है, जो यह दर्शाता है कि सरकार के दिलों-दिमाग में विपक्ष के प्रति कोई सम्मान नहीं बचा है।
गहलोत ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिस प्रकार केंद्र में मोदी राज के दौरान संसद के भीतर और बाहर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेताओं का सम्मान नहीं किया जा रहा है, वही रवैया राज्य की सरकार भी अपना रही है।

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