सरकार की गिरती हुई साख को बचाने के लिए तिरंगा यात्रा निकालना भाजपा व संघ की मुहिम: ध्रुवचन्द जायसवाल
August 16th, 2026 | Post by :- | 94 Views

गोरखपुर (एके जायसवाल)। तिरंगा भारत की आन बान शान के साथ सम्मान का प्रतीक है जब कि किसी एक पार्टी का प्रतीक नहीं है। यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की राष्ट्रीयता का प्रतीक बन चुका है। अब इसका कोई दुरुपयोग नहीं कर सकता है जब देश के जांबाज बहादुर सैनिकों के हाथ में झंडा तिरंगा लेकर अपनी सरजमीं पर तिरंगा गाड़कर लहराते हैं या परेड में लेकर चलते हैं तो भारत के करोड़ करोड़ एक-एक नागरिकों के देश प्रेम का ज्वलंत शौर्य गाथा स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहास को दोहराते हुए ज्वलंत कर देते हैं।

राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ने के चक्कर में संघ ने अपने कार्यालय पर आजादी के कई दशकों तक तिरंगा 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा फहराने का कार्य नहीं किया। किंतु आज वोट की चक्कर में तिरंगा यात्रा निकालने का कार्यक्रम चलाया गया जो गौरव के प्रतीक है। देर से ही भाजपा एवं संघ जागा किंतु जैसे भी हो राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ने के लिए मजबूर हुआ यह तिरंगा यात्रा अभियान कितना सरकार को राहत पहुंचायेंगी।

पिछड़े, दलितों,आदिवासियो एवं बड़ी संख्या में युवाओं के साथ जो भी वादा किया जुमला साबित हुए यहाँ तक कुछ सवर्ण भी आहत है। तिरंगा यात्रा से कितना राहत मिलेगा समय आने पर पता चलेगा। उक्त ब्यान अखिल भारतीय कलवार कलाल कलार जायसवाल महासभा के राष्ट्रीय महासचिव ध्रुवचन्द जायसवाल ने जारी किया।

ध्रुवचन्द जायसवाल ने स्मरण कराते हुए कहा कि केंद्रीय नेतृत्व एवं भाजपा के रणनीतिकारों को अनेकों बार कहा कि मेरे समाज को 2014, 2019 एवं 2024 के लोकसभा चुनाव मे एक भी टिकट नही मिला एवं विधानसभा में भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

2022 के चुनाव के पूर्व महासभाका 31पदाधिकारियों का समूह आदरणीय स्वतंत्र देव सिह से मिला उनके आश्वासन पर 3 से 6 स्वजातियों को टिकट मिला। उनके हटते ही नगरीय चुनाव मे 3 महापौर की जगह मात्र एक महापौर है। पूर्वाचल मे एक भी महापौर नहीं है। जिलो एवं टाउन एरिया मे टिकट देने मे उपेक्षा की गई फिर भी महासभा ने इसके एवज में राज्यसभा व विधान परिषद में प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया जाए जिससे मेरा समाज देश की मुख्य धारा से जुड़कर जहा नीति निर्धारण किया जाता है वहां अपनी विचार को रख सके।

किंतु हमारे समाज की उपेक्षा कर किसी प्रकार का कोई सुनवाई नहीं हुई जिसके कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मेरे समाज के लोगों को टिकट इसलिए नहीं मिला कि संघ ने अपनी स्वीकृति नहीं प्रदान की होगी और न ही संघ की तरफ से हमारे समाज के व्यक्ति का नाम केन्द्र को नही भेजा होगा। केन्द्रीय नेतुत्व ने राजनीति से मेरे समाज को दूर कर दिया परिणाम यह हुआ कि जहाँ यूपी से लोकसभा मे समाज के तीन सांसद जीतकर जाते थे आज जीरो संख्या है। भाजपा के केंद्रीय एवं रणनीतिकारों ने नहीं चेता तथा महासभा के पिछली मांगो एवं विचारों का सम्मान नहीं किया तो वैश्य बाहुल्य 90 सीटों पर आश्चर्य-चकित किन्तु सत्य परिणाम अप्रत्याशित होंगे।

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