(जयपुर पटाखा फैक्ट्री विस्फोट) 8 मौतों ने खोली अवैध कारोबार और सिस्टम की परतें
June 10th, 2026 | Post by :- | 5 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । खोनागोरियां थाना क्षेत्र की तलाई, जोन नंबर-10 में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट ने पूरे राजस्थान को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत की सूचना सामने आ चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए। मृतकों में एक मासूम बच्चा भी शामिल है, जो मजदूरों को पानी पिलाने के लिए फैक्ट्री पहुंचा था और आग की चपेट में आ गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रिहायशी इलाके के एक मकान में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के मकानों की दीवारें तक हिल गईं और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। दमकल और सिविल डिफेंस की टीमों को आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
*हादसे से बड़े सवाल*
स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पटाखा फैक्ट्री करीब तीन वर्षों से संचालित हो रही थी। इतना ही नहीं, आसपास भी इसी तरह की अन्य इकाइयों के होने की चर्चा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह गतिविधियां लंबे समय से चल रही थीं तो प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई या फिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
हादसे के बाद क्षेत्र की बसावट को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि तलाई क्षेत्र में बड़ी संख्या में मकान और व्यावसायिक गतिविधियां सरकारी भूमि पर विकसित हुई हैं। यदि यह सच है तो फिर बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाएं किस आधार पर उपलब्ध कराई गईं? लोगों की मांग है कि पूरे क्षेत्र की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए।
*सिर्फ फैक्ट्री मालिक नहीं,सिस्टम भी कटघरे में*
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अवैध और खतरनाक कारोबार आखिर प्रशासन की नजरों से कैसे बचते हैं। यदि रिहायशी इलाके में बारूद और विस्फोटक सामग्री का भंडारण हो रहा था, तो उसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? क्या केवल फैक्ट्री संचालकों पर कार्रवाई पर्याप्त होगी या फिर उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी जिन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की?
आज 8 मौतें,कल और बड़ा हादसा?
घनी आबादी के बीच विस्फोटक सामग्री का भंडारण और निर्माण किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अभी भी अवैध निर्माणों और अवैध कारोबारों पर सख्ती नहीं हुई तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है।
*उच्च स्तरीय जांच की मांग*
हादसे के बाद पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि जांच केवल विस्फोट के कारणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर इतने वर्षों तक यह कारोबार किसके संरक्षण में चलता रहा। खोनागोरियां का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं,बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही,अवैध निर्माण,सरकारी जमीन पर कब्जों और सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवालों का प्रतीक बन गया है। अब देखना यह है कि राजस्थान सरकार दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई करती है और क्या इस हादसे से कोई सबक लिया जाएगा या फिर कुछ समय बाद यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।

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