*महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के 202 वें जन्मोत्सव का भव्य शुभारंभ*
February 12th, 2026 | Post by :- | 18 Views

मनोज शर्मा,चंडीगढ़। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के 202 वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में केन्द्रीय आर्य सभा के तत्वावधान में चार दिवसीय भव्य कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया। यह आयोजन चंडीगढ़, पंचकूला एवं मोहाली की समस्त आर्य समाज संस्थाओं तथा आर्य शिक्षण संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से आर्य समाज सेक्टर-9, पंचकूला में प्रारंभ हुआ।
महर्षि दयानन्द सरस्वती जी केवल भारत ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के महान युगपुरुष थे। उन्होंने वेदों की पुनर्स्थापना, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा जाति-पाति, छुआछूत,अंधविश्वास, नारी शोषण एवं पाखण्ड के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया। उनका सम्पूर्ण जीवन मानवता, राष्ट्र और वैदिक संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित रहा।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातःकाल वेदशतकम् यज्ञ, भक्तिमय भजन एवं प्रवचन आयोजित किए गए। यज्ञ ब्रह्मा के रूप में स्वामी सच्चिदानन्द जी तथा यज्ञ संयोजक के रूप में आचार्य जयवीर वैदिक ने अनुष्ठान सम्पन्न कराया। भजनोपदेशक पंडित भूपेन्द्र सिंह आर्य ने भक्तिमय संगीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
सायंकालीन सत्र में भी वेदशतकम् यज्ञ, भजन एवं प्रवचन का आयोजन किया गया। अपने संबोधन में स्वामी सच्चिदानन्द जी ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया और आज उनकी विचारधारा समाज का मार्गदर्शन कर रही है। उन्होंने बताया कि विकट परिस्थितियों में ही महान आत्माओं का जन्म होता है, जैसे भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, आदि शंकराचार्य और महर्षि दयानन्द सरस्वती ने धर्म एवं संस्कृति की रक्षा हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने अल्प समय में अत्यंत व्यापक कार्य किया। वे कभी रुके नहीं, न झुके, बल्कि निरंतर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहे। उन्होंने वेदों एवं शास्त्रों का गहन अध्ययन किया, इतिहास का सूक्ष्म विश्लेषण किया तथा उस समय कार्य किया जब वेद विद्या लगभग लुप्त हो चुकी थी और धर्म के नाम पर अनेक पाखण्ड प्रचलित हो गए थे। उन्होंने धर्मग्रंथों की गलत व्याख्याओं का खंडन करते हुए सत्य के मार्ग का प्रकाश किया तथा समाज को वैदिक सिद्धांतों से अवगत कराया। आर्य समाज इसी वैदिक जागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन का प्रतीक है।
यह चार दिवसीय आयोजन वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार, सामाजिक जागरूकता तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

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