✍️ लोकहित एक्सप्रेस न्यूज़ संवाददाता विक्रम कुमार नागेश की रिपोर्ट गरियाबंद छत्तीसगढ़
गरियाबंद _ छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, नारी शक्ति और अटूट आस्था का जीवंत पर्व हरितालिका तीजा मंगलवार को गरियाबंद जिले में पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक रंग के साथ मनाया गया सुबह से ही घरों और पूजा स्थलों में भक्ति का माहौल रहा जिला मुख्यालय स्थित पुराना मंगल बाजार तीजा पर्व की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा, जहां बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं और युवतियों ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की।
दिनभर व्रतधारी महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर शिव-पार्वती से अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की कामना की वहीं कुंवारी युवतियों ने भी मनचाहे और सुयोग्य वर की प्राप्ति की कामना के साथ तीजा व्रत रखा पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं के बीच मेहंदी, बिंदी, गहनों और श्रृंगार की छटा देखते ही बन रही थी लोकगीतों की मधुर गूंज और पूजा-अर्चना से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।
शिव-पार्वती के अखंड मिलन का प्रतीक है तीजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज का व्रत किया जाता है मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी इसी तप और समर्पण की स्मृति में महिलाएं तीजा का कठिन व्रत रखती हैं।
विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं यही वजह है कि तीजा को पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और दांपत्य एकता का प्रतीक भी माना जाता है।
करू भात से शुरू होती है व्रत की कठिन साधना
छत्तीसगढ़ में तीजा की अपनी विशिष्ट लोकपरंपरा है व्रत से एक दिन पहले महिलाएं ‘करू भात’ ग्रहण करती हैं इसके बाद शुरू होती है निर्जला तपस्या व्रतधारी महिलाएं दिनभर अन्न और जल का त्याग कर भगवान शिव-पार्वती की भक्ति में लीन रहती हैं।
पूजा के दौरान गौर माता यानी मिट्टी से निर्मित माता पार्वती की प्रतिमा तथा भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। हल्दी, कुमकुम, चंदन, बेलपत्र, सुहाग सामग्री और मौसमी फलों से भगवान का श्रृंगार किया जाता है। रात्रि में जागरण, भजन-कीर्तन और तीजा गीतों का दौर चलता है।
पुराना मंगल बाजार में दिखी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की खूबसूरत झलक
गरियाबंद के पुराना मंगल बाजार में तीजा के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों और आभूषणों के साथ अपनी संस्कृति का रंग बिखेरा हाथों में रची मेहंदी, माथे पर बिंदी, पारंपरिक गहने और सोलह श्रृंगार ने वातावरण को और आकर्षक बना दिया।
फूलों से सजे फुलेरा, दीयों की रोशनी और झूलों की झंकार के बीच गूंजते तीजा के पारंपरिक गीतों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया सावन-भादो की हरियाली और लोकगीतों की मधुर धुन के बीच महिलाओं की सामूहिक पूजा ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की।
भारती सिन्हा ने कहा—प्रेम और एकता का प्रतीक है तीजा
भारती सिन्हा ने कहा कि तीजा पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और एकता को मजबूत करने वाला पर्व माना जाता है उन्होंने कहा कि तीजा केवल व्रत नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ा हुआ पर्व है।
लक्ष्मी सिन्हा ने बताया—तीजा में बहती है आस्था और संस्कृति की धारा
लक्ष्मी सिन्हा ने कहा कि शिव-पार्वती के प्रेम की धारा बहती झील जैसी है और मानसून की हरियाली में श्रृंगार के पुष्प खिल उठते हैं करू भात की कड़वाहट और व्रत की पवित्रता से महिलाएं स्वयं को सजाती-संवारती हैं और तीजा के गीतों में अपनी आस्था पिरोती हैं।
उन्होंने कहा कि झूलों पर गूंजते लोकगीत, हाथों में मेहंदी और व्रत के सत्व की शक्ति नई उम्मीदों का आह्वान करती है यह पर्व केवल भक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि हर घर और हर मन को जोड़ने वाली सामूहिक लय भी है।
अंजली सिन्हा बोलीं—करू भात से निर्जला तपस्या तक नारी शक्ति का प्रतीक
अंजली सिन्हा ने कहा कि करू भात से शुरू होकर निर्जला तपस्या तक पहुंचने वाला तीजा पर्व नारी शक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है वृंदावन की हरियाली तीजा का संदेश प्रेम, व्रत और श्रद्धा की अनूठी मिसाल के रूप में सामने लाती है।
उन्होंने कहा कि एक दिन पहले करू भात से व्रत की तैयारी होती है और अगले दिन निर्जला तपस्या में भक्ति का आलोक दिखाई देता है झूलों की मधुर धुन, सावन की ठंडी बयार और तीजा गीतों की रागिनी इस पर्व को और खास बना देती है यह पर्व केवल संस्कृति नहीं, बल्कि आस्था की ऐसी धारा है जो हर दिल को छू लेती है।
पूजा-अर्चना में रेणुका सिन्हा, राधिका सिन्हा और अंजली सिन्हा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं सामूहिक पूजा, लोकगीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच गरियाबंद में तीजा पर्व ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और नारी शक्ति की अद्भुत तस्वीर सामने रखी।
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