जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । राज्य कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने अपने आंदोलन को तेज कर दिया है। महासंघ के आह्वान पर आज 25 मई से प्रदेशभर के सरकारी विभागों और कार्यालयों में कर्मचारियों द्वारा प्रतिदिन एक घंटे का सांकेतिक कार्य बहिष्कार शुरू किया गया है।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ तथा प्रदेश पदाधिकारियों अजयवीर सिंह, शेर सिंह यादव और सर्वेश्वर शर्मा ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि 20 मई को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों एवं कार्यालय प्रमुखों के माध्यम से ज्ञापन सौंपने के बावजूद सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। इसके विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत की है।
महासंघ के अनुसार 25 मई से अगले सात दिनों तक प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे से 1:30 बजे तक प्रदेशभर के कर्मचारी सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में कार्य प्रभावित होने की संभावना है।
महासंघ ने आरजीएचएस (RGHS) योजना को निजी बीमा कंपनी को सौंपने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे पूर्व की भांति सरकारी स्तर पर संचालित रखने की मांग की है। इसके अलावा रोके गए सरेंडर लीव के नगद भुगतान की बहाली, पदोन्नति में दो वर्ष की शिथिलता, संविदा एवं ठेका कर्मचारियों को नियमित करने सहित 25 सूत्रीय मांग पत्र पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई है।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार के बाद भी सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन के अगले चरण में पूरे प्रदेश में “कर्मचारी जागृति यात्रा” निकाली जाएगी। महासंघ का कहना है कि आंदोलन के विस्तार की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।





