जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । जयपुर राजस्थान व्यवसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य चार्टर ऑफ डिमांड्स में स्वास्थ्य एवं सुरक्षित पर्यावरण को नागरिकों के मौलिक अधिकार बनाएं जाने की।जन स्वास्थ्य अभियान भारत (जेएससीए) ने विश्व स्वास्थ्य दिवस पर अपने राज्य इकाइयों और संबद्ध संगठनों के साथ मिलकर 1 से 7अप्रैल 26 तक व्यवसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय अभियान सफलतापूर्वक संपन्न किया। अतुल्य निधि, चंद्रकांता यादव,राही रियाज़, महजबीन भट्ट ने बताया कि इस अभियान के दौरान देश के हर प्रदेश में जागरूकता बैठक और परामर्श कार्यक्रमों हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया जिसमें 28राज्य और 8केन्द्र शासित प्रदेश के नागरिकों की भागीदारी रही। जिसमें 2006से अधिक हस्ताक्षर, श्रमिकों, नागरिकों,जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों ने व्यवसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य चार्टर ऑफ डिमांड्स का चर्चा कर समर्थन एवं अनुमोदन किया।जिसे भारत के माननीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किया गया है। गौरांग मोहापात्रा, संजीव सिन्हा, दीपमाला पटेल,मित्र रंजन ने कहा कि इस अभियान में रेखांकित किया गया कि व्यवसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती है, जिसके समाधान के लिए स्वास्थ्य,श्रम, पर्यावरण, उद्योग और खनन सहित विभिन्न क्षेत्रों में त्वरित और समन्वित कार्यवाही आवश्यक है।
*मुख्य चिंताएं:
जे एस ए आई राजस्थान यूनिट के कैलाश मीणा, अनिल गोस्वामी, हेमलता कंसोटिया, बसंत हरियाणा, सोहनलाल ने कहा कि पूरे देश में राजस्थान में सिलिकोसिस से पीड़ित मरीज जो कि संख्या सबसे अधिक है। वायु,जल और मिट्टी प्रदूषण के बढ़ते स्तर जो श्र्वसन रोगो, व्यवसायिक बीमारियों और समय पूर्व मृत्यु का कारण बन रहें हैं। विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए व्यवसायिक स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। सिलिकोसिस,एस्बेस्टोसिस और रासायनिक सम्पर्क जैसी व्यवसायिक बीमारियों का व्यापक रूप से बहुत कम निदान और रिपोर्टिंग होती है। श्रमिकों, महिलाओं और बच्चों सहित कमजोर वर्गों पर आसमान रूप से अधिक प्रभावित होते हैं। वर्तमान समय के कानूनों और नीतियों के क्रियान्वयन व निगरानी में कमी भी इसका प्रमुख कारण है।साथ ही राजस्थान में स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम 2022 विधानसभा में पारित हुए ढाई साल से अधिक का समय हो गया लेकिन कानून की भावना एवं लाभ अभी वास्तविकता में परिवर्तित नहीं हो पाई है,वर्तमान सरकार की उसके नियम एवं उपनियम बनाने में अभी तक कोई रूचि नहीं रही है।
*जन स्वास्थ्य अभियान भारत (JSAI) ने भारत सरकार से निम्नलिखित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
*स्वच्छ वायु,जल मिट्टी के साथ सुरक्षित पर्यावरण को जन स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाया जाएं सभी के* लिए सुरक्षित पेयजल की सार्वजनिक उपलब्धता सुनिश्चित की जाएं।
*सभी श्रमिकों, विशेषकर असंगठित क्षेत्र के लिए, व्यवसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा की गारंटी दी जाएं।
*निगरानी, रोकथाम, उपचार और मुआवजा तंत्र सहित व्यवसायिक स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम स्थापित किया जाएं।
“सभी विकास परिजनाओ के लिए स्वास्थ्य प्रभाव आकलन अनिवार्य किया जाएं।
*जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का समाधान किया जाएं और सतत् विकास को बढ़ावा दिया जाए।
*एस्बोस्टोस जैसे खतरनाक पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया जाए और विषैले रसायनों को नियंत्रित किया जाएं।
*नीतिगत और कानूनी ढांचे को मजबूत किया जाएं जिसमें अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन कन्वेंशन 155का अनुमोदन शामिल हो।
परामर्श बैठकों में इस बात पर जोर दिया गया कि यह किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी मंत्रालयों का समन्वय और जवाबदेही आवश्यक है।
जन स्वास्थ्य अभियान ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह तत्काल प्रभाव से कार्यवाही करें पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराएं और प्रभावी क्रियान्वयन तंत्र सुनिश्चित करें, ताकि लाखों श्रमिकों और नागरिकों के स्वास्थ्य और आजिविका की रक्षा हो सके।





