चंडीगढ

*डॉ. विनोद शर्मा के 27वें काव्य संग्रह कठोपनिषद काव्य का हुआ विमोचन*

मनोज शर्मा/चंडीगढ़। प्रसिद्ध कवि डॉ. विनोद शर्मा के 27वें काव्य संग्रह कठोपनिषद काव्य का विमोचन फगवाड़ा से पधारे सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. जवाहर धीर ने चर्चित लेखक प्रेम विज के निवास स्थान सेक्टर 37 में किया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध समाजसेवी के के शारदा, जाने माने लेखक प्रेम विज,पंजाबी लेखक प्रिंसिपल बहादुर सिंह गोसल,बंदना धीर, कर्नल सुरेंद्र सिंह,अनीता सिंह,राज विज,शायरा डॉ. संगीता शर्मा ,कुंद्रा गीत,अंजू मोदगिल,उपस्थित रहे। डॉ विनोद शर्मा ने कहा कि यजुर्वेद की 101 शाखायें मानी गई थीं। उनमें से एक प्रसिद्ध कठशाखा थी। इस शाखा के रचयिता कठ ऋषि थे, इसलिए उसका नाम कठ शाखा पड़ा। यह उपनिषद कठशाखा की है। इसलिए इसे कठोपनिषद कहते हैं। इस उपनिषद् में 2 अध्याय मौर 6 वल्लियां हैं। इस उपनिषद् में यम और नचिकेता के संवाद रूप में एक काल्पनिक कथा के द्वारा आत्मा और परमात्मा के सम्बन्ध में गूढ़ तत्त्व का वर्णन किया गया है। मरने के अनन्तर जीवात्मा की सत्ता रहती है वा नहीं ? यह प्रश्न प्रतिदिन मनुष्यों के हृदयों में उत्पन्न होता है।
काव्य रूप में इसे रोचक रूप में बताया गया है। यम गुरु और नचिकेता शिष्य ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं थे, केवल आख्यायिका रूप में समझाने के लिए इन नामों की कल्पना की गई है। कई भाष्यकार इन्हें ऐतिहासिक व्यक्ति मानते हैं। उनका यह विचार निराधार है। यह आलंकारिक भाषा में ठीक बैठता है। कोई भी ऐतिहासिक पुरुष अजर और अमर नहीं हो सकता। अनेक अन्य प्रमाण भी इसी उपनिषद में आये हए सिद्ध करते हैं कि उपनिषद् की यह कथा आलंकारिक है, ऐतिहासिक नहीं। इसे काव्य में रचने का मुख्य उद्देश्य गूढ़ रहस्यों को आसान करना, मनोरंजन बनाना तथा साधारण पाठक के लिए भी समझने योग्य बनाना है। यह पुस्तक उनके सामाजिक और साहित्यिक कार्यों को देखते हुए प्रेम विज और राज विज को समर्पित है

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