चंडीगढ

*कमान्ड अस्पताल चंडीमंदिर ने सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट कर रचा इतिहास; उत्तर-पश्चिम भारत में दूसरा सरकारी संस्थान बना*

मनोज शर्मा,चंडीगढ़ । सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और क्षेत्रीय कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में,कमान्ड अस्पताल, चंडीमंदिर ने मल्टीपल मायलोमा (एक गंभीर और जटिल रक्त कैंसर) से ग्रसित एक रोगी का पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट (या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट) सफलतापूर्वक कर, चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
यह अत्यंत जटिल और जीवनरक्षक प्रक्रिया 12 जून 2025 को सम्पन्न की गई। इसका नेतृत्व सर्जन कैप्टन डॉ. मिर्जा सलीम अमजद, क्लीनिकल हेमेटोलॉजिस्ट ने किया,जिनके साथ ऑन्कोलॉजी में विशेष रूप से प्रशिक्षित नर्सिंग अधिकारियों की एक समर्पित टीम — लेफ्टिनेंट कर्नल कमलेश,मेजर कीर्ति एवं मेजर दिव्या — ने मिलकर अद्वितीय टीमवर्क का प्रदर्शन किया। इस बहु-आयामी प्रयास में हेमेटोपैथोलॉजिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल शिल्पी सक्सेना और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद अनस शेख ने भी अत्यंत महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
रक्त कोशिकाओं की सफल पुनः वृद्धि (एंग्राफ्टमेंट) और सभी रक्त गणनाओं के सामान्य होने के पश्चात, रोगी को 30 जून को स्वस्थ और स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई — जो केवल एक चिकित्सकीय उपलब्धि नहीं,बल्कि संस्थानिक समर्पण और उत्कृष्ट देखभाल का साक्षात उदाहरण है।
यह उपलब्धि कमांडेंट मेजर जनरल हरकिरत सिंह और उप कमांडेंट ब्रिगेडियर विशाल के प्रेरणादायी नेतृत्व में संभव हो सकी,जिन्होंने कमान्ड अस्पताल को कैंसर उपचार में आत्मनिर्भरता और उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर किया। यह उपलब्धि न केवल सशस्त्र बलों में उन्नत रक्त कैंसर देखभाल को सुदृढ़ करती है, बल्कि दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) जैसे रेफरल केंद्रों पर बोझ कम करती है और पूर्व सैनिकों को निजी अस्पतालों में महंगे उपचार से भी राहत प्रदान करती है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ,कमान्ड अस्पताल,चंडीमंदिर अब उत्तर-पश्चिम भारत में पीजीआई एम ईआर,चंडीगढ़ के बाद ऐसा करने वाला दूसरा सरकारी संस्थान बन गया है — जिससे यह संस्थान पंजाब,हरियाणा,हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ क्षेत्र में रक्त विकारों के लिए एक प्रमुख उपचार केंद्र के रूप में स्थापित हो गया है।
इस सफलता के पीछे प्रोफेसर डॉ. पंकज मल्होत्रा,विभागाध्यक्ष,क्लीनिकल हेमेटोलॉजी व मेडिकल ऑन्कोलॉजी,पीजीआई एम ईआर, चंडीगढ़ का मार्गदर्शन अत्यंत निर्णायक रहा। उन्होंने टीम को तकनीकी प्रशिक्षण,नैदानिक मार्गदर्शन एवं निरंतर सहयोग प्रदान कर यह सुनिश्चित किया कि यह ट्रांसप्लांट अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा मानकों के अनुरूप संपन्न हो।
इस उपलब्धि की आधारशिला पूर्व कमांडेंट मेजर जनरल मैथ्यूज जैकब,के दूरदर्शी नेतृत्व में रखी गई थी। उनके प्रयासों से अस्पताल में एक विशेषीकृत हेमेटोलॉजी सेंटर तथा स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सुविधा की स्थापना हुई। उल्लेखनीय है कि इस अत्याधुनिक केंद्र का उद्घाटन 10 मई, 2025 को पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ,लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार द्वारा किया गया था।
आज,हेमेटोलॉजी सेंटर, कमान्ड अस्पताल चंडीमंदिर पूर्ण रूप से सुसज्जित है और ल्यूकीमिया,लिंफोमा,एप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया,हीमोग्लोबिनोपैथीज़ और मल्टीपल मायलोमा जैसे जटिल रक्त विकारों के लिए समग्र और आधुनिक देखभाल प्रदान करता है। यह केंद्र अब उन्नत सी ए आर – टी सेल थेरेपी जैसे नवीनतम इम्यूनोथेरेपी विकल्पों के लिए भी तैयार है — जिससे यह भारतीय सशस्त्र बलों में सबसे अग्रणी रक्त कैंसर उपचार केंद्रों में से एक बन गया है।
यह सफल ट्रांसप्लांट सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कैंसर देखभाल में एक ऐतिहासिक मोड़ है। यह न केवल भविष्य में स्थायी और आत्मनिर्भर बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि यह हमारे सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के प्रति संस्था की करुणा, प्रतिबद्धता और नवाचार का प्रतीक है।

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