गजसिंहपुर,(यश कुमार)। श्री महावीर ड्रामेटिक क्लब के मंच पर आयोजित लीला में शुक्रवार को भगवान श्रीराम के सीता वियोग, जटायु के प्राण त्याग, शबरी की अनन्य भक्ति, राम-हनुमान मिलन तथा सुग्रीव-बाली युद्ध सहित बाली वध के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया। लीला के आरंभ में भगवान हनुमान जी की आरती की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष हरजीत मिगलानी, युवा नेता पवनजोत सिंह हुंदल, पदमपुर के समाजसेवी खुशवंत सिंह गिल तथा पदमपुर के शिवप्रेमी एवं पटाखा व्यवसायी भारत भूषण उपस्थित रहे। लीला में माता सीता के हरण के बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा वन में उनकी खोज का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। सीता के वियोग में श्रीराम के विलाप और व्याकुलता को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से दर्शाया। इसके बाद घायल जटायु से श्रीराम की भेंट का दृश्य मंचित हुआ। जटायु ने रावण से माता सीता को बचाने के लिए संघर्ष किया था। अपने अंतिम क्षणों में जटायु द्वारा सीता हरण की जानकारी श्रीराम को देने और प्राण त्यागने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। यह दृश्य धर्म की रक्षा, साहस और त्याग का संदेश देने वाला रहा रामलीला का एक प्रमुख आकर्षण शबरी प्रसंग रहा। वर्षों से भगवान श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा कर रही शबरी की भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का सुंदर मंचन किया गया। वन में श्रीराम और लक्ष्मण के पहुंचने पर शबरी की प्रसन्नता तथा प्रभु के प्रति उसके निश्छल प्रेम को भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। शबरी और श्रीराम के संवाद ने दर्शकों को भक्ति का संदेश दिया। इस प्रसंग के माध्यम से यह दर्शाया गया कि भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्कपट प्रेम ही भक्ति का वास्तविक आधार है। इसके बाद भगवान श्रीराम और हनुमान जी के मिलन का मंचन किया गया। हनुमान जी की विनम्रता, बुद्धिमत्ता और प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण ने इस प्रसंग को विशेष बना दिया। राम-हनुमान मिलन के बाद सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता तथा सुग्रीव को उसके भाई बाली से मुक्ति दिलाने की कथा आगे बढ़ी। सुग्रीव और बाली के बीच हुए युद्ध का रोमांचक मंचन किया गया। अंत में भगवान श्रीराम द्वारा बाली का वध किया गया। इस प्रसंग ने दर्शकों को रामायण की कथा के अगले चरण से जोड़ दिया। लीला में भगवान श्रीराम की भूमिका बालकिशन गिरधर, लक्ष्मण की दिनेश शर्मा, माता सीता की रणवीर, बाली की ललित काठपाल, सुग्रीव की छगन व्यास, अंगद की तन्मय वधवा, तारा की शिवचरण, हनुमान जी की संजय जुनेजा तथा शबरी की भूमिका सतीश वधवा ने निभाई।
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