गजसिंहपुर,(यश कुमार)। नगर निकाय चुनाव को लेकर गजसिंहपुर शहर की सियासत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। शहर में इन दिनों राजनीतिक फिजा पूरी तरह से चुनावी रंग में रंगी नजर आ रही है। चाय की दुकानों से लेकर राजनीतिक चौपालों तक एक ही चर्चा है – इस बार चुनावी हवा का रुख बदल रहा है। शहर में इन दिनों एक तरफ जहां “कांग्रेस का बोर्ड बनेगा” की हवा चलने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा खेमे में भी समीकरण साधने की कवायद जारी है। कांग्रेस समर्थक जहां अपने पक्ष में माहौल बनने का दावा कर रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक भी अपनी पकड़ मजबूत होने की बात कह रहे हैं। चुनावी मैदान में कौन बाजी मारेगा, इसका फैसला तो मतदाता करेंगे, लेकिन फिलहाल चुनावी चर्चाएं चरम पर हैं। इसी बीच रक्षाबंधन के त्योहार और चुनावी माहौल ने राजनीतिक चर्चाओं में मिठास घोलने का काम किया है। मगर सियासी तंज कसने वाले इसे कुछ अलग अंदाज में देख रहे हैं। चर्चा करने वालों का कहना है कि डबल इंजन सरकार में गन्ना तो नितिन गडकरी जी के प्रोजेक्ट एंथोल में चला गया, लेकिन चीनी की मिठास चुनावी राजनीति में फीकी नजर आ रही है। शहर में यह भी चर्चा है कि पिछले समय में विकास और सरकार की योजनाओं को लेकर किए गए दावों का असर अब चुनावी मैदान में कितना दिखाई देता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा रक्षाबंधन के बाद चुनावी रंग और गहरा होने की संभावना है। टिकटों की दौड़, संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता और वार्ड स्तर पर बैठकों के बीच अब हर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटा है। 20 वार्डों में दावेदारों की भरमार से मुकाबला रोचक होता जा रहा है। फिलहाल गजसिंहपुर की सियासी फिजा में एक सवाल सबसे ज्यादा तैर रहा है क्या इस बार सच में कांग्रेस का बोर्ड बनेगा, या आखिरी समय में भाजपा चुनावी समीकरणों को पलट देगी जवाब मतपेटियों में बंद होगा और फैसला जनता की उंगली करेगी।
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