पानीपत को बनाया पुरी(उडीसा),भगवान जगन्नाथ जी की जय उद्घोष से:- स्वामी श्री हरिदास राधेशनन्दन जू
October 2nd, 2019 | Post by :- | 27 Views

भगवान जगन्नाथ जी को जन्मोत्सव की शुभकामनाए देने हुई जन्मोत्सव की शुरूआत हुई जिसमे वृन्दावन के प्रसिद्ध सन्त स्वामी श्री हरिदास राधेशनन्दन जू ने श्री भगवान जगन्नाथ जी की महिमा का बखान किया एवं उनकी प्राक्टय लीला के बारे में अवगत कराया।
वृन्दावन से आए स्वामी श्री हरिदास राधेशनन्दन जू के सानिध्य में भगवान जगन्नाथ जी का जन्मोत्सव मनाया गया जिसमें स्वामी जी ने सुमधुर भजन गाकर भगवान जगन्नाथ जी का अभिवादन किया एवं उनको शुभकामनाए दीं।
स्वामी जू ने बताया कि, भगवान जगन्नाथ के नाम से ही स्पष्ट होता है कि, वह जगत के नाथ हैं। भगवान जगन्नाथ ही मात्र एक ऐसे भगवान हैं जो अपने भक्तो, प्रेमियो के लिए हाथ फैलाए खडे रहते कि, आओ मै सदैव तुम्हारे लिए हाथ फैलाए खडा हूँ, मुझे प्राप्त करने का मात्र एक ही मार्ग है वह है प्रेम
प्रेम से बुलाओ तो मैं माँ कर्माबाई की खिचडी जो वह मात्र प्रेम से बनाती थीं न कि, विधी विधान और नियमो से । ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सिर्फ प्रेम है।
भगवान जगनन्नाथ प्रेम की दयामूर्ती है। वह जिस प्रकर माँ कर्माबाई की खिचडी को प्रेम से खाते थे यह प्रेम तो कोई माँ के गर्भ से जन्मा बालक भी नही दर्शाता। भगवान जगन्नाथ ने एकादशी के दिन चावल न खाने के सन्देह को दूर किया है। पुरी धाम में आपको वर्ष पर्यन्त चावल का भोजन ही मिलता है वह कहते हैं संसार की प्रत्येक वस्तु मेरी बनायी है तो फिर हम इसमे अच्छा बुरा, खाना य ना खाना का भेद क्यों करते हैं आप वह काम करें जो प्रेम से कर सकते हैं न कि, नियमो से।