श्री गणपति आरती
October 7th, 2019 | Post by :- | 14 Views

|| श्री गणपति आरती / सुखकर्ता दुखहर्ता ||

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची|
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची|
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची|
कंठी झरके माल मुक्ताफळाची || १ ||
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती|
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती||
रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा|
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा|
हिरे जडित मुकुट शोभतो बरा|
रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया || 2 ||
लंबोदर पितांबर फनी वरवंदना|
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना|
दास रामाचा वाट पाहे सदना|
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवंदना|
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती|
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती || ३ ||

|| श्री गणपति आरती / शेंदूर लाल चढायो ||

शेंदूर लाल चढायो अच्छा गजमुखको ||
दोंदिल लाल बिराजे सूत गौरीहरको ||
हाथ लिए गुड-लड्डू साईं सुरवरको ||
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पदको || 1 ||
जय जय श्री गणराज विध्यासुखदाता ||
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ||
अष्टो सिद्धि दासी संकटको बैरी ||
विघनाविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ||
कोटि सूरजप्रकाश ऐसी छबि तेरी ||
गंड-स्थल मदमस्तक झूले शाशिहारी || 2 ||
जय जय श्री गणराज विध्यासुखदाता ||
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ||
भावभगत से कोई शरणागत आवे ||
संतति सम्पति सभी भरपूर पावे ||
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ||
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे || 3 ||
जय जय श्री गणराज विध्यासुखदाता ||
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ||