फाग उत्सव
March 6th, 2020 | Post by :- | 57 Views

अम्बाला कैण्ट में, राणा परिवार एवं श्री रमण विहारी जी ट्रस्ट द्वारा आयोजित फाग उत्सव बडे धूमधाम से मनाया गया। वृन्दावन से आए सन्त श्री राधेशनन्दन प्रभुजी ने सुमधुर वाणी से सबको फाग का महत्तव बताया। प्रभुजी ने सुमधुर वाणी में फाग के भजन सुनाए जिन्हे सुनकर श्रोता झूम उठे।
कथा श्रवण के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आए। जिसमें हाजीपुर बिहार से मीरा जी परिवार एवं सीतापुर से कल्याणी जी परिवार ने अपना पूर्ण सहयोग दिया।

प्रभुजक ने बताया फगुआ का मतलब फागुन के त्योहार (होली) से है। इस दौरान लोग फाग के गीत गाते हैं और इनकी धुनों पर जमकर नृत्य भी करते हैं। वृन्दावन में इसकी शुरुआत वसंत पंचमी से ही हो जाती है और होली के दिन तक लगातार फाग गाए जाते हैं।
स्वामी जी ने बताया की वृन्दावन की होली पूरे विश्व में सिर्फ इसलिए प्रसिद्ध नही है क्योकी यह रंग सम्मान के साथ सबसे ज्यादा दिन चलने वाला त्यौहार है, वरन् यह इसलिए प्रसिद्ध है क्योकि, इस त्यौहार को श्री कृष्ण व राधा के प्रेम रंगो से जोडकर देखा जाता है। श्री कृष्ण एवं राधा जी का प्रेम जितना पवित्र है उतना ही यह त्यौहार है।
स्वामी जू ने कहा कि, आजकल कुछ लोग मदिरा एवं अन्य व्यसन में पडकर इस त्यौहार का वास्तविक रूप खराब कर रहे हैं। सिर्फ वृन्दावन ही एक ऐसी जगह है जहाँ यह त्यौहार पूर्ण प्रेम, सदव्यवहार, सौम्यता से एवं भाईचारे से खेला जाता है।

 

स्वामी जी ने श्री रसखान जी के पद गाकर होली की महत्ता बताई।
*फागुन लाग्‍यो जब तें तब तें ब्रजमंडल धूम मच्‍यौ है।*
*नारि नवेली बचैं नहिं एक बिसेख यहै सबै प्रेम अच्‍यौ है।।*
*साँझ सकारे वही रसखानि सुरंग गुलाल लै खेल रच्‍यौ है।*
*को सजनी निलजी न भई अब कौन भटू जिहिं मान बच्‍यौ है।*