आरटीआई मंच ने लड़ी बेटियों की लड़ाई, जिले के लोगों ने दी बधाई
March 13th, 2018 | Post by :- | 104 Views

नूंह मेवात ,( लियाकत अली )  ।    आजादी के 71 साल बाद मेवात क्षेत्र के खंड नगीना के 22 गांवों को 12वीं का स्कूल नसीब हुआ है। अब मांड़ीखेड़ा गांव में लडके और लडकियों के लिए अलग-अलग दो राजकीय सीनियर सेकैंडरी स्कूल बनाए जायेंगे। वहीं एक अप्रैल से इन स्कूलों में कक्षाऐं भी लगेंगी ताकि दसवीं में पढऩे वाले 466 छा-छात्राऐं अपनी पढ़ाई जारी रख पाएं। बीते 4 मार्च से मांडीखेडा गांव में गुरूग्राम अलवर राजमार्ग स्थित राजकीय उच्च विद्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है जो मंगलवार को 10 वें दिन हरियाणा शिक्षामंत्री रामविलास शर्मा व फिरोजपुर झिरका के विधायक चौधरी नसीम अहमद की अपील के बाद मेवात आरटीआई मंच ने समाप्त कर दिया। धरने पर बैठे सभी लोगों को मिठाईयां खिलाई गई और उनके गले में फलमालाऐं डालकर अनशन समाप्त किया गया। यह महाभियान शहीद राजा हसन खान मेवाती व अन्य महापुरुषों को समर्पित किया गया है। मेवात आरटीआई मंच के संयोजक राजुद्दीन ने बताया कि यदि हरियाणा सरकार 01 अप्रैल से 12वीं की कक्षाऐं लगाने में आनाकानी करती है तो 29 मार्च से दोबारा अनिश्चितकालीन अनशन मांड़ीखेड़ा स्कूल के सामने शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि ये मांग हजारों बेटियों की है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम को बल देती है। भाजपा सरकार का नारा है कि सबका साथ-सबका विकास इसलिए आजादी के बाद मांड़ीखेड़ा और आसपास के 22 गांवों को राजकीय सीनियर सेकैंडरी का दर्जा देकर एक बड़ी जिम्मेदारी निभाई है। समाजसेवी राजुददीन ने बताया कि मांड़ीखेड़ा स्कूल अपग्रेड धरना शहीद राजा हसन खान मेवाती व मेवात क्षेत्र की बेटियों के लिए समर्पित है। मैं सरकार का तहदिल से शुक्रगुजार हूं। इसके अलावा जिला उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा, डीईओ दिनेश कुमार शास्त्री के भी आभारी है। जिन्होंने लगातार पत्राचार के जरिए मामले में कार्रवाई की। साथ ही विधानसभा में तीनों विधायकों ने लंबे समय बाद मांड़ीखेड़ा के 22 गांवों को सीनियर सेकैंडरी स्कूल बनाने की वकालत की, उनका भी धन्यवाद। जिन गांवों के लोगों व सामाजिक संगठन ने धरने में आकर शिरकत की, उन सभी का शुक्रिया। पूर्व सरपंच फजरुदीन बेसर,  डाक्टर गुलशन प्रकाश और डाक्टर अशफाक आलम ने कहा कि समाजसेवी राजुददीन ने लगातार 10 दिन धरना पर बैठकर 22 गांवों की लड़ाई लड़ी है। उसकी जितनी तारीफ़ की जाए कम है। सभी लोगो ने राजुददीन को माला पहनाकर व लड्डू खिलाकर धरना खत्म कराया। उनकी टीम को भी बधाई दी। समाजसेवी मौलाना साबिर कासमी, ने कहा कि हमारे आसपास के गांवों ज्यादातर बुजर्गों ने इसी स्कूल से तालीम ली है। किसान व दलित नेता डॉ. गुलशन प्रकाश, वरिष्ठ समाजसेवी फजरूदीन बेसर, डॉ. असफाक आलम, सिरौली बाईसी के चौधरी सोहराब खान, पूर्व सरपंच इसमाईल, जफरूल्ला खान, शिक्षाविद्ध वीरभान, कवि इलियास प्रधान, समाजसेवी साहून मालब ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर चौधरी आलम रानीका, ईशाक मूलथान, हाजी कमरूदीन कंसाली, जाहुल खेडला पुन्हाना, डॉ. हनीफ, डॉ. जमशेद, राजेश, अबरार, हाजी इसमाईल आदि सैंकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे।