ये लड़किया यूं मुँह को क्यों लपेटे घूमती है : जोगा सिंह
February 18th, 2018 | Post by :- | 169 Views

मैं कई बार कुछ लड़कियों को मुँह बांधे देखता हूँ
तो ये लड़किया यूं मुँह को क्यों लपेटे घूमती है?

शायद सुंदरता को बचाने के लिए हैI
धूप से शायद चमड़ी का रंग काला पड़ जाता होगा I
मुँह का रंग कहीं काला ना पड़ जाए
इसलिए मुँह को ढक कर रखा जाता है I
शायद बाहर सड़कों पर प्रदूषण बहुत हैI
लेकिन मैं सोचता हूँ
कि इनको इतनी फ़िक्र है अपने रंग की
लेकिन इनके शरीर में कौनसी भयानक बीमारियां पल रही है
उनके बारे में ये बिलकुल अनजान हैI
और फिर तन कैसे सुंदर रह सकता है
अगर मन बीमार हैI

इनको जल्दी ही शुगर, उच्च रक्तचाप, एसिडिटी
और कब्ज जैसी बीमारिया होने वाली है
और सबको हो भी रही है
लेकिन उधर इनका ध्यान बिलकुल नहींI
एक बार मैंने अपनी माता जी को हड्डियों के चोटी के डॉक्टर को दिखायाI
उसने बताया
कि 3 में 4 औरतों को रीड की हड्डी कि समस्या होती हैI

अगर ये सारी बीमारिया 40 साल में लगनी शुरू होंगी
तो इसका मतलब ये बीमारियां रातो रात थोड़ी लगी होंगीI
नहीं, इनकी शुरुवात तभी से हो जाती है
जब से वो मुँह लपेटना शुरू करती है
लेकिन इनको इस समस्या से कोई लेना देना नहींI
अंदर क्या चल रहा है इससे कोई मतलब नहींI

सारी मिठाईया ये नकली खा रही है,
फ़ास्ट फ़ूड खूब खाती है,
इनके भोजन में कोई पोषक तत्व है नहीं
लेकिन मुँह को ढककर चलेंगीI
और फिर मन के स्वास्थ्य के बिना
तो शरीर सुंदर हो ही नहीं सकता,
चाहे आप कुछ भी खा लो, कितना मुँह ढक लोI
जिस दूध को ये दिन-रात प्रयोग कर रही है वह नकली है और जहरीला हैI
सारी सब्जियां और फल जेहरीले हैI
इस तथ्य से ये लड़कियां बिलकुल अनभिज्ञ हैI
भला जब अंदर जहर जा रहा है
तो आप अपनी चमड़ी को सूरज की किरणों से बचाकर क्या करोगे?
आप अपनी शरीर की कोशिकाओं को सही पोषण दो,
आपकी चमड़ी आपने आप सूरज की तीखी किरणों से लड़ लेंगीI

और फिर मन के स्वास्थ्य के बिना तो शरीर सुंदर हो ही नहीं सकता,
चाहे आप कुछ भी खा लो, कितना मुँह ढक लोI
अब आप समझ पा रहे होंगे
क्यों हमारी भ्रस्टाचार, शोषण, साम्प्रदायिकता, बेरोजगरी जैसी समस्याएं
आज तक हल नहीं हुईI
ये इसलिए हल नहीं हुई क्योंकि इनको हल करने हमारी कोई रूचि है ही नहींI
हम उलझे हुए हैI
जैसे इन लड़किओं की समयस्या तेज सूरज की किरणे नहीं,
बल्कि खाने-पीने और सोचने की गलत आदते हैI

ऐसे ही देश की समस्याएं तो भ्रस्टाचार, शोषण, बेरोजगारी और साम्प्रदायिकता है
लेकिन सारा देश धार्मिक होने में लगा है I
हर आदमी दिन-रात भगवान् को पाने में लगा हैI
जबकि लड़की के मुँह लपेटने की तरह भगवान् की तो जिंदगी में कोई जरूरत ही नहींI
आप भूखे प्यासे मर रहे हो लेकिन आप प्राप्त भगवान् को करना चाहते होI
बड़ी अजीब सोच हैI
अब सब कुछ गलत खा रहे हो, खून की कमी है, पोषक तत्वों की भोजन में कमी है
लेकिन चमड़ी को सूरज की किरणों से बचाओगेI

कभी इन्होने ये नहीं सोचा
कि जिसके लिए ये सुंदर होना चाहती है
उसकी सोच कैसी है?
जिस शादी की व्यवस्था में ये बंधने जा रही है
वह कितनी जायज है?
क्या ये लड़कियां एक स्वतंत्र जीवन जीने जा रही है
या नहीं?
क्या कभी आपने अपने आस पास नजर घुमा कर देखा
कि जिनकी शादी हुई क्या वो वास्तव में खुश है?
और जिन्होंने अपने रंग रूप को बचा कर रखा
क्या उनको उसका कोई फायदा हुआ?

मेरे गावं में जब भी कोई शादी होती तो सबसे पहला सवाल यही होता था
कि बहु कैसी है? सभी कहते कि बहु बहुत सुंदर आई हैI
लेकिन कुछ समय बाद जब उसी बहु से मेरा मिलन होता
तो मुझे लगता कि इसमें सुंदर वाली तो कोई बात है नहींI
सभी इस बहु को सुंदर क्यों कह रहे थे ?
वह बहु सुंदर थी, लेकिन बस शादी तकI
वास्तव में लड़की शादी तक बहुत फिट रहती है
लेकिन शादी के दो-तीन साल में ही अपनी सुंदरता गवा बैठती हैI
बहुत सी लड़कियां मोटी हो जाती हैI

आप तो यह समझे बैठे हो
कि आपकी शाद्दी की व्यवस्था बहुत ही स्वस्थ हैI
अगर यह प्रणाली स्वस्थ होती
तो लड़की के सपने महज 3 साल में चकनाचूर क्यों हो जाते?
अगर आप मेरी फोटो देखो
तो मैं पिछले 20 साल में लगातार जवान होता जा रहा हूँ I
अगर आपकी शादी व्यवस्था
वास्तव में ही सुखद और उपयोगी होती
तो आपकी पत्नी को भी तो और सुंदर और जवान होते जाना थाI

मैं बड़ा हैरान होता कि यह लड़की 25 साल तक कैसे फिट रही
लेकिन शादी होते ही इसकी शक्ल बिगड़ने लगती हैI
मेरा तो यह अनुमान है कि जो उसने सपने संजोये थे,
वो जल्दी शादी के बाद मिटटी में मिलने लगते है I
जिंदगी में निराशा आ जाती हैI
वजन खाने-पीने से नहीं बढ़ता, वजन निराशा और हताशा से बढ़ता हैI
मैंने देखा कैसे नई-नई बहू को लड़का कार या मोटरसाईकल पर बैठाए
कई बार बजार में घुमाता नजर आएगाI

लेकिन तीन-चार साल बाद
फिर वही पत्नी अकेले में ही बजारों में भटकती मिलेगीI
जल्दी लड़के का मोह भंग हो जाता हैI
बोलो कहाँ गया वह मुँह को लपेटनाI
अब तो कोई देखने वाला ही नहीं रहाI
अगर मेरी यह गणना सही है
तो आप सोच सकते हो
हमारी व्यवस्थाएं कितनी बदबू मारती हैI
मुझे इन मुँह को लपेटे लड़कियॉं के पास से बहुत दुर्गन्ध आती है
क्योंकि ये सच्चाई से कोसो दूर हैI
इनको जो करना चाहिए वह तो ये कर ही नहीं रहीI
ये तो कहीं और ही उलझी हुई हैI
एक बहुत बड़ा भटकाव है I
जीवन के साथ एक बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा हैI

अब हरियाणा में स्कूल जाने वाली और कॉलेज जाने वाली
80 % लड़कियों में खून की कमी पाई गईI
अब अगर ये लड़किया मुँह लपेटकर चले
तो कितने शर्म की बात हैI
कैसे बचेगी उनकी कलाईयों की सुंदरता
जब सारा समाज ही बीमार मानसिकता से ग्रस्त है?
इसी तरह का ढोंग मुझे हमारे समाज के हर पक्ष में दिखाई देता है
अगर आपके पास देखने वाली आंख हो तोI

ऐसे ही मुझे समाज की हर प्रक्रिया, हर व्यवस्था में भटकाव नजर आता हैI
हमारी सारी शिक्षा, धर्म, देश प्रेम,
भाईचारा, दाम्पत्य जीवन,
सेहत सब इन लड़कियों के मुँह लपेटने जैसा ढोंग हैI
सच्चाई का तो हमें पता ही नहींI
और अगर हमारा नजरिया दुरुस्त हो जाए
तो जीवन में क्रांति आ जाएगीI
वास्तव में हम जितनी भी चीजे जीवन में कर रहे है
उनकी कोई अहमियत है ही नहीं।