खूबसूरत मॉडल और समाज सेवी का सात नहीं ग्यारह जन्म का साथ ,,,,,,
February 13th, 2018 | Post by :- | 20 Views

चण्डीगढ़ (मनोज शर्मा)   ।     अमूमन कोई लड़की शादी करने के लिए सुंदर ,अच्छी नौकरी और पैसे वाला लड़का चाहती है मगर मदर टेरेसा से प्रभावित चंडीगढ़ की बेहद खूबसूरत एक युवती ने लड़के की सुदंरता ,अच्छी नौकरी और पैसा टक्का ना देख कर अपने लिए समाज सेवा को समर्पति एक युवक ढूंढा और इस तलाश में उसको करीब चार साल लगे। इतना  ही नहीं अलग अलग धर्म से होने की वजह से इनको शादी भी दो बार करनी पड़ी। लड़की हिन्दू परिवार से है और लड़का सिख परिवार से ,,,इसलिए इन्होंने  दोनों परिवारों की धार्मिक भावनाओं को बराबर महत्व देते एक बार हिन्दू रीति रिवाज से तो एक बार सिख रस्म से शादी की ,,,इसके चलते इनकी  शादी के  फेरे भी 7 ( सात)की बजाय 11(ग्यारह ) बार हुए ,,,,यानि साथ जन्म का नही बल्कि ग्यारह जन्म का है ,,,,,अब भी दोनों पति पत्नी निजी संस्था जे जुड़ कर समाज सेवा को समर्पित हैं।

चंडीगढ़ पुलिस के साथ ट्रेफिक मार्शल और कई ऐड फिल्म में काम कर चुकी मॉडल  खूबसूरत ईशा पर यूँ तो किसी भी राजकुमार का दिल आ जाता मगर इस हसीना ककड़िया की नजरें अपने जीवन साथी के रूप में एक ऐसे युवक को तलाश रही थी जो खुद से ज्यादा लिए ओरों के लिए जीता हो । बचपन  में ही मदर टेरेसा की ईशा काकड़िया के दिल पर  गहरी छाप लगी क्यूंकि ईशा ने  माता पिता और टीचरस से मदर टेरेसा के बारे काफी कुछ सूना कि कैसे मदर टेरेसा ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण और जरूरतमंद लोगों को समर्पण कर दिया था । इसलिए ईशा ने खुद भी समाज सेवा में अपने कदम आगे बढ़ाए और साथ ही फैसला किया कि वो अपना जवीन साथी भी ऐसे युवक को बनाएगी   जो सुंदर या अमीर भले ही हो ना हो मगर औरों के लिए जीने का जज्बा उसमे खूब हो।  ईशा ने लोगों जरूरतमंद लोगों की सहायता करने के लिए तम्मना नाम से खुद एक निजी सामाजिक संस्था बनाई ।इसमें एक सिख युवक जसकरण भी जुड़ गया।  ईशा ने बताया कि करीब चार साल तक जसकरण के लोगों की सहायता करने के जज्बे को आंकती रही और आखिर उसे अपना जीवन साथी बनाने का फैसला कर लिया। अब दोनों की शादी को साढ़े पांच  साल हो गए हैं ,और तम्मना संस्था के जरिये दोनों समाज सेवा से जुड़े हैं। जसकरण के अनुसार  ईशा जैसी खूबसूरत जीवन साथी मिलना किसी हसीन सपना पूरा होने जैसा था और शायद उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि समाज सेवा का इतना हसीन इनाम उसे हासिल होगा। क्यूंकि ईशा हिन्दू परिवार से है जबकि जसकरण सिख परिवार से लिहाजा शादी के वक्त भी दोनों समुदाय की धार्मिक भावनाओं का दोनों ने बराबर ख्याल रखा और दोनों ने शादी एक बार हिन्दू रीति रिवाज से फेरे लेकर की तो दूसरी बार सिख धर्म की मर्यादा के अनुसार आनंद कारज करवाए गए। ऐसे इनकी शादी में सात (7) की बजाए ग्यारह (11 ) फेरे हुए यानि दोनों सात जन्म नहीं बल्कि ग्यारह जन्म के साथी बन गए। वर्ष दो हजार आठ से दोनों तम्मना नामक समाजिक संस्था जे जुड़ कर जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे है और इस संस्था के सैकड़ों सदस्य भी उनके साथ हैं।फिलहाल ईशा और जसकरण की कहानी तो ये ही संदेश देती है कि जीवन साथी तन से सुंदर और जेब से अमीर हो ना हो मगर दिल से सुंदर और दिल का ही धनवान हो तो बेहतर है।