चैंपियन मां का सपना उसकी लाडली भी बने चैंपियन और लाडली ने मा के पदचिन्हों पर चलते हुए बुल्गारिया में अंतर-राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता कांस्य पदक जीतकर किया देश का नाम रोशन
February 9th, 2018 | Post by :- | 175 Views

कैथल, लोकहित एक्सप्रैस, (ब्यूरो चीफ विशाल चौधरी ) ।मां की कुर्बानियों के बारे में तो खूब देखा-सुना-पढ़ा होगा लेकिन पिता भी बच्चे की परवरिश के लिए ढेरों समझौते करते हैं। कम से कम आशा देवी को देखकर तो यही लगता है। कैथल में रहने वाली आशा देवी मां और पिता की दोहरी भूमिका निभा रहा है। वह अपनी बेटी सपना के सपनों को पूरा करने के लिए पांच सालों से प्रयासरत रही और हाल ही में उसकी लाडली ने  बुल्गारिया देश के सोफिया शहर में  इंटरनेशनल बॉक्सिंग में देश के साथ साथ माँ का नाम भी रोशन कर दिया।

आपने ‘दंगल’ फिल्म में गीता और बबीता फोगट के संघर्ष की कहानी तो देखी ही होगी। कुछ ऐसी ही कहानी है 40  साल की आशा देवी की। वह गरीबी में जिंदगी बसर करती हैं लेकिन उन्होंने न सिर्फ अपनी 19  साल की बेटी को बॉक्सिंग बनने के लिए प्रेरित किया।और उसकी लाड़ली ने कंधे में फ्रैक्चर होने के बावजूद माँ के सपने की पूरा करते हुए बुल्गारिया देश के सोफिया शहर में हुई इंटरनेशनल बॉक्सिंग में सपना ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।

सपना ने  2013  बॉक्सिंग की शुरुआत की बॉक्सिंग का जज्बा उसकी नस-नस में था और पहली साल में ही  स्टेट में 4 गोल्ड मेडल जीते उसके बाद सपना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। परन्तु 2014 एक दुर्घटना में सपना को चोट लगने के कारण वो खेल ना सकी।  परन्तु सपना की माँ ने उसका होसला बनाये रखा और सपना 2015  में दुबारा रिंग में उतरी तो उसने दो गोल्ड मेडल 1 सिल्वर मेडल 2 ब्राउज़ मेडल जीते और फिर 2016 में 3 गोल्ड 1 सिल्वर और 1  ब्राउज़ मेडल जीता। पदको का सिलसिला यु ही चलता रहा और 2017 में 4 गोल्ड 1 सिल्वर जीता। हाल ही में बुल्गारिया देश के सोफिया शहर में हुई इंटरनेशनल बॉक्सिंग में सपना ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया बुल्गारिया जाने से पहले सपना के कंधे में फ्रैक्चर हो गया था और उसे सलाह  दी गई थी कि वह ना खेले परंतु सपना के मन में एक ही  बात थी  कि वह खाली हाथ तो नहीं आएगी सपना का दावा है कि अगली बार वह गोल्ड से कम पर सब्र  नहीं करेगी सपना चाहती है की वो  देश के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर आए और अपने परिवार और देश का नाम रोशन करें।

 सपना की माता आशा देवी ने बताया है कि वह जुडो की इंटरनेशनल प्लेयर रही है परंतु जल्दी शादी होने के बाद  उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला अपने समय मे वो नेशनल में  7 गोल्ड मेडल जीत चुकी है।  और वो इंटरनेशनल  लेवल पर भी खेल चुकी है परन्तु शादी होने के कारण वह  आगे नहीं खेल सकी। परन्तु वो अपनी बेटी को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाना चाहती थी। अपनी बेटी पर गर्व करते हुए बताया कि जब भी  सपना मेडल जीतकर आती है तो पूरा परिवार उनकी बेटी सपना पर गर्व करता है उन्होंने बताया की  सपना सुबह और  शाम को ग्राउंड में प्रैक्टिस करती है और दो घंटे दोपहर को वो खुद उसकी प्रेक्टिस करवाती है उनका दावा है कि उनकी बेटी ओलंपिक में जाएगी और देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर जरूर आएगी उनका कहना है कि उनकी बेटी सपना ही उनका सपना पूरा  जरुर करेगी।
कोच राजेंद्र सिंह के अनुसार सपना 2013 ग्राउंड में आई थी तो इसकी एनर्जी को देख कर हमें लग गया था किए एक बड़ी खिलाड़ी बनेगी और और यह पहले ही वर्ष में 4 गोल्ड मेडल जीतकर इसमें सिद्ध कर दिया इसमें एक इंटरनेशनल खिलाड़ी बनने की क्षमता है। हम इस को तराश  रहे हैं और जल्द ही हमें उम्मीद है यह  ओलंपिक खेल कर  भारत को गोल्ड मेडल  देगी।