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अध्यात्म ही बच्चों में संस्कारों की जड़ों को मजबूत कर सकता है

Lokhit Express Jagadhri। 03/05/26 : दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पंचम दिवस का शुभारंभ मुख्य यजमान शोभित गुप्ता, वर्तिका गुप्ता, राजीव ढींगरा, अल्का ढींगरा, रूपेश विज, मोनिका विज, राजन और जैसमीन द्वारा सामूहिक रूप से पूजन किया गया। इस अवसर पर सम्मानीय अतिथि के रूप में ऋषिपाल एवं रेणु बाला (विधायक, सढौरा), विरेन्द्र सिंह (SHO सिटी, जगाधरी), श्री घनश्याम अरोड़ा (विधायक, यमुनानगर), हरिन्द्र सिंह गिल, निर्मलजीत कौर गिल, उमाशंकर सपरिवार, अमित(मण्डल अध्यक्ष, प्रताप नगर), हेमन्त भारती, संदीप गुप्ता , राजेश कश्यप , डा० अश्वनी सुधीर गुप्ता , विजय कुमार जोगिन्द्र सिंह, कुलदीप सिंह, निश्चल चौधरी (युवा मोर्चा), राजपाल (जिलाध्यक्ष BJP SDEO), पूनम रानी (Lecturer), दीपक (जिला मंत्री), कृष्ण कुमार (मण्डल अध्यक्ष, जगाधरी), डा० रमेश, डा० आयुषी और अमित (मोन्टी) ने ज्योति प्रज्वलन की रस्म को निभाया ।

तत्पश्चात सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री कालिंदी भारती जी ने भागवत के माहात्म्य के अंतर्गत आत्मदेव की अभिलाषा और धुंधुकारी की उद्दंडता का वर्णन करते हुए कहा कि यह केवल पौराणिक कथा नहीं वरन् आधुनिक समाज के लिए कालातीत दर्पण है। यह गाथा वर्तमान समाज को चेतावनी दे रही है कि यदि संतति के सृजन में संस्कारों के बीज नहीं बोए गए, तो कुल-वृक्ष का पतन सुनिश्चित है। संतान केवल कुल का विस्तार नहीं अपितु संस्कारों का संवाहक होनी चाहिए। आज आवश्यकता है कि हम भावी पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से बचाकर उनमें अध्यात्म के बीज आरोपित करें। वर्तमान समाज एक अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। जहां एक ओर हम तकनीकी रूप से शिखर छू रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारी भावी पीढ़ी संस्कार शून्य की गहरी खाई में गिरती जा रही है। आज के बच्चे शिक्षित तो हैं, लेकिन उनमें बोध की कमी है। वे इंटरनेट से सूचनाएं तो जुटा रहे लेकिन धैर्य खोते जा रहे हैं। बच्चों में बढ़ती उद्दंडता और नैतिक मूल्यों का ह्रास हर अभिभावक के लिए एक गंभीर प्रश्न है, आखिर कैसे करें बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण?

साध्वी जी ने इस ज्वलंत समस्या का समाधान बताते हुए कहा कि इसका एक मात्र उपाय है—अध्यात्म। अध्यात्म बच्चों को अपने भीतर देखना सिखाता है। जब वह ध्यान करता है तो उसमें आत्मनियंत्रण पैदा होता है जो उसे गलत करने से रोकता है, गलत रास्ते पर जाने से रोकता है। आज के बच्चे असंतोष के शिकार हैं। अध्यात्म उन्हें ईश्वर और प्रकृति के प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है। जो बच्चा कृतज्ञ होना सीख जाता है वह कभी संस्कार विहीन या हिंसक नहीं हो सकता है। जब बच्चा ईश्वर से जुड़ता है तो उसमें परोपकार, करुणा एवं दया के संस्कार स्वतः ही आरोपित होने लगते हैं। साध्वी जी ने कहा कि बच्चों को संस्कार सुविधाओं या बाजार से खरीदकर नहीं दिए जा सकते। इसके लिए घर में भी आध्यात्मिक वातावरण का होना अनिवार्य है। यदि हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ी सुशिक्षित होने के साथ-साथ सुसंस्कारवान भी हो तो हमें शिक्षा प्रणाली और पारिवारिक जीवन में अध्यात्म को अंगीकार करना ही होगा। बिना आध्यात्मिक आधार के संस्कार टिक नहीं सकते। अध्यात्म वह खाद है जो बच्चों के चरित्ररूपी पौधे को विशाल और फलदार वृक्ष बनाती है।

कथा के अंत में आरती के पावन अवसर पर अमर सिंह (HSSC), रोजी मलिक आनंद (पूर्व चेयरपर्सन, समाज कल्याण बोर्ड), नवीन गुलाटी (जिला अध्यक्ष, सेवा भारती), अनिल ठकराल (जिला अध्यक्ष, पंजाबी मंच), संदीप राय (मण्डल महामन्त्री), सीमा गुलाटी (निगम पार्षद), राज कुमार त्यागी सुरजीत सिंह , सत्यम नागपाल , वरुण नागपाल सोमपाल .विपन गम्भीर सपरिवार, रामस्वरूप जी सपरिवार, कुन्दन लाल मल्होत्रा सपरिवार एवं अम्बर सिंह सपरिवार ने सम्मिलित होकर प्रभु की दिव्य आरती का लाभ प्राप्त किया।

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Tarun Sharma Senior Journalist Haryana.