सीएम के आदेश के ग्यारह माह बाद भी नहीं मिली दिव्यांग शौकीन कोटला को नौकरी , (खबर की विडियो जरूर देखें )
October 11th, 2018 | Post by :- | 312 Views
  नूंह मेवात ,( लियाकत अली )  ।  मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दिव्यांग शौकीन कोटला को नौकरी देने के आदेश पर ग्यारह माह बाद भी जिला प्रशासन ने कोई अमल नहीं किया है। कई डीसी जिले में इस दौरान बदल चुके हैं ,लेकिन शौकीन कोटला के अच्छे दिन नहीं आये। दिव्यांग शौकीन कोटला लघु सचिवालय के चक्कर काट काटकर थक चुका है ,लेकिन उसे भरोसे के सिवाय कुछ नहीं मिला। शौकीन कोटला ने कहा कि सीएम मनोहर लाल ईमानदार और अच्छे व्यक्ति हैं। गरीबों -दिव्यांगों से उन्हें हमदर्दी है। लेकिन अधिकारी उनके आदेशों को भी पलीता लगा रहे हैं। दिव्यांग कई हजार रुपये का पैट्रोल स्कूटी में फूंक चुका है ,लेकिन शिक्षित ग्रेजुएट होने के बावजूद भी नियमित तो दूर डीसी रेट की नौकरी भी नहीं मिल पाई। शौकीन कोटला ने कहा कि सीएम मनोहर लाल से उन्होंने मिलकर अपनी पीड़ा फिरोजपुर झिरका में कई माह पहले रैली के दौरान सुनाने की सोची थी ,लेकिन सुरक्षा घेरा मजबूत होने के कारण वह सीएम से तो नहीं मिला ,लेकिन महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव पटौदी को उन्होंने अपनी पीड़ा जरूर सुनाई। शौकीन कोटला ने कई मंत्रियों के सामने भी अपना दुखड़ा रखा ,लेकिन जब अधिकारी मुख्यमंत्री की ही नहीं सुनते , तो केंद्र और राज्य के मंत्रियों के आदेशों की परवाह किसे है। सीएम मनोहर लाल ने गत 18 नवंबर 2017 को लघु सचिवालय परिसर में दिव्यांगों को ट्राई साईकिल वितरित करते हुए दिव्यांगों से बातचीत की थी। उसी दौरान दिव्यांग शौकीन ने नौकरी की पेशकश की तो ,सीएम ने उनसे शिक्षा के बारे में पूछा। ग्रेजुएट शौकीन को सीएम ने नौकरी देने के लिए तत्कालीन डीसी नूंह को आदेश दिए थे। उसके बाद शौकीन नूंह जिला उपायुक्त से पता नहीं कितने बार ग्यारह माह के अंतराल में मिले ,लेकिन मिलने का कोई असर नहीं हुआ। शौकीन अब मंत्रियों -अधिकारियों के चक्कर लगाकर मायूस हो चुका है ,लेकिन हिम्मत अभी नहीं हारी है।
  शौकीन कोटला ग्रेजुएट हैं। सामाजिक कार्यों में भी उनकी रूचि है। 23 वर्षीय शौकीन नूंह खंड के कोटला गांव के रहने वाले हैं। सीएम के भरोसे के बाद शौकीन ही नहीं जिले के पढ़े -लिखे दिव्यांगों में उम्मीद की किरण जगी थी ,लेकिन अब उन्हें निराशा हाथ लगती दिखाई दे रही है। शौकीन कोटला ने कहा कि वे सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिलकर ग्यारह महीने के अपने संघर्ष को बताना चाहते हैं।